बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय, गया में 'हिंदी पखवारा' के अंतर्गत एक दिवसीय भव्य राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी का मुख्य विषय "हिंदी की विकास यात्रा: चुनौतियाँ और संभावनाएँ" रखा गया था. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मगध विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार मंगलम और विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. परम प्रकाश राय उपस्थित रहे.
मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार मंगलम ने हिंदी की ऐतिहासिक विकास यात्रा पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत से शुरू हुई यह यात्रा पाली, प्राकृत और अपभ्रंश से होते हुए खड़ी बोली के रूप में विकसित हुई और अंततः 14 सितंबर 1949 को इसे देश की राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुआ.
उन्होंने कहा कि हिंदी किसी भी अन्य भाषा से कम नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वाभिमान, सम्मान और हमारी आत्मा की सच्ची भाषा है. आज बेल्जियम, इंग्लैंड और अमेरिका जैसे विकसित देशों के छात्र भी उच्च शिक्षा के स्तर पर इसे पढ़ रहे हैं. वहीं, दुनिया की बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को हिंदी सिखाने के लिए विशेष रूप से प्रेरित कर रही हैं, जो इसके विशाल बाजार और इसकी बढ़ती हुई वैश्विक ताकत को स्पष्ट रूप से दर्शाता है. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के राजनीतिक मतभेदों से परे यह पूरे देश में सबसे अधिक समझी और बोली जाने वाली सबसे बड़ी भाषा है.
भाषा की सहजता पर दिया गया बल
डॉ. मंगलम ने भाषा की सहजता पर विशेष बल देते हुए कहा कि हिंदी का जबरन तत्समीकरण कर उसे हास्यास्पद बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है. उर्दू, अंग्रेजी या अन्य जिन भाषाओं के शब्द हिंदी में स्वाभाविक रूप से घुल-मिल चुके हैं, उनका प्रयोग पूरी सहजता के साथ किया जाना चाहिए.
विशिष्ट अतिथि डॉ. परम प्रकाश राय ने अपने संबोधन में हिंदी को "ज्ञान-विज्ञान की भाषा" बनाने का पुरजोर आह्वान किया. उन्होंने कहा कि जर्मन, फ्रेंच और जापानी भाषाओं की तरह हिंदी में भी सभी विषयों की मानक और बेहद सहज पुस्तकें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होनी चाहिए.
डॉ. राय ने आगाह करते हुए कहा कि डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में, जहां ध्वनि (वॉइस) ही संवाद का मुख्य माध्यम बनती जा रही है, लगातार लिखने और पढ़ने की आदत घटने से हमारे शब्द-भंडार पर बुरा असर पड़ रहा है. इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में हिंदी की समृद्ध शब्दावली को बचाकर रखना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है.
बैंक कामकाज में शत-प्रतिशत हिंदी के प्रयोग पर जोर
कार्यक्रम की शुरुआत में क्षेत्रीय प्रबंधक संजय कुमार तिवारी एवं राजभाषा अधिकारी विकास कुमार ने सभी आगत अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया. उन्होंने कहा कि बैंक अपने दैनिक कामकाज में हिंदी के शत-प्रतिशत प्रयोग और अपने सभी सम्मानित ग्राहकों को उनकी अपनी भाषा में बेहतरीन सेवाएँ देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. इस संगोष्ठी में बैंक के सभी अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. कार्यक्रम के अंत में 'हिंदी पखवारा' के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया.
