तिलक में विषाक्त नाश्ते से 100 बीमार

खिजरसराय थाने के लोदीपुर गांव में हुई घटना खिजरसराय : गया जिले के खिजरसराय थाना क्षेत्र के लोदीपुर गांव में शनिवार की शाम एक तिलक समारोह में विषाक्त नाश्ते से करीब 100 लोग फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ गये. 45 लोगों को खिजरसराय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व अन्य को अलग-अलग निजी अस्पतालों में भरती […]

खिजरसराय थाने के लोदीपुर गांव में हुई घटना
खिजरसराय : गया जिले के खिजरसराय थाना क्षेत्र के लोदीपुर गांव में शनिवार की शाम एक तिलक समारोह में विषाक्त नाश्ते से करीब 100 लोग फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ गये. 45 लोगों को खिजरसराय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व अन्य को अलग-अलग निजी अस्पतालों में भरती कराया गया. विषाक्त भोजन खाने से उत्पन्न बीमारी का असर रविवार की दोपहर तक बना रहा. नये मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी. इस घटना के बाद भय से लड़की पक्ष के लोगों ने तिलक की रस्मअदायगी कर जल्दबाजी में अपने घरों को लौट गये.
जानकारी के मुताबिक, खिजरसराय के लोदीपुर गांव के ईश्वरीयादव के छोटे बेटे पवन कुमार का तिलक समारोह था. बेलागंज थाना क्षेत्र के वाजितपुर गांव से लड़कीवाले आये थे. शाम के वक्त तिलक की रस्म निभाने आये लड़की पक्ष व गांववालों को नाश्ता कराया गया. नाश्ते के करीब दो घंटे के भीतर ही तिलक चढ़ाने आये लोगों के बीच अफरातफरी मच गयी. दर्जनों लोग उलटी-दस्त के शिकार हो गये. उलटी से परेशान कई लोग बगैर तिलक चढ़ाये ही अपने गांव को लौट गये. इसी बीच, लोदीपुर गांव के स्थानीय लोगों के बीच भी उलटी-दस्त की शिकायत सामने आने लगी. उलटी करनेवालों की संख्या में लगातार इजाफा होने लगा. गांव में अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया. रविवार की दोपहर तक उलटी करनेवालों की संख्या 100 के करीब पहुंच गयी थी.
इस मामले की सूचना स्थानीय एसडीओ राधाकांत को दी गयी. एंबुलेंस से मरीजों को खिजरसराय पीएचसी में भरती कराया गया. सरकारी अस्पताल में दवा व डॉक्टर की अनुपलब्धता के कारण दर्जनों मरीजों ने निजी अस्पताल की ओर रुख कर लिया. इस दौरान मरीजों व चिकित्सकों के बीच नोक-झोक भी हुई. चिकित्सकों के मुताबिक, इलाज के लिए भरती हुए लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है. ग्रामीणों के अनुसार पैकेट में मिले नाश्ते को खाने से ही वे लोग बीमारी की चपेट में आये. अस्पताल में इलाज के लिए आये लोगों के परिजन रोशन कुमार व नवलेश कुमार सहित अन्य का कहना था कि उन्होंने सिर्फ खाना खाया, नाश्ता नहीं किया था. इसी वजह से उनके शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. नाश्ते के बाद फूड प्वाइजनिंग के शिकार लोगों में बच्चों की संख्या अधिक है.

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