संवेदनहीनता. बाल संरक्षण आयोग ने जारी किया नोटिस
हेल्पिंग ह्यूमन संस्था ने आयोग से की थी शिकायत
प्रसनजीत
गया : शहर के सीबीएसइ विद्यालयों की बसें तमाम तय मानकों को दरकिनार कर चल रही हैं. इस मामले में शिकायत के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर दिया है. आयोग ने इस पूरे मामले में जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सह हेल्पिंग ह्यूमन नामक संस्था के सदस्य भास्कर अग्रवाल ने आयोग में शिकायत दर्ज करायी है. श्री अग्रवाल की शिकायत के बाद ही अायोग ने यह नोटिस जारी किया है. आयोग ने क्षेत्रीय परिवहन पदाधिकारी व जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस मामले में जवाब मांगा है. आयोग की सदस्य प्रियंका कानुनगो द्वारा जारी नोटिस में इस मामले में हुई अब तक की कार्रवाई की भी जानकारी मांगी गयी है.
कोर्ट की अवमानना करते हैं स्कूल :अधिवक्ता श्री अग्रवाल ने 20 अप्रैल को अपनी संस्था हेल्पिंग ह्यूमन की ओर से राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को एक पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने गया में कई विद्यालयों द्वारा सीबीएसइ बोर्ड व सुप्रीम कोर्ट के द्वारा स्कूल की बसों के लिए तय किये गये नियमों का पालन नहीं करने का जिक्र किया है. उन्होंने पत्र में कहा है कि यह बच्चों के अधिकारों के हनन के साथ-साथ कोर्ट के निर्देश की भी अनदेखी है. उन्होंने कहा कि बच्चों को घर से स्कूल लाने व उन्हें वापस पहुंचाने को लेकर कभी भी स्कूल प्रबंधन व बच्चों अभिभावकों के बीच कोई सामंजस्य नहीं होता. उन्होंने आयोग से इस पूरे मामले में जांच टीम गठित करने और दोषी पाये जाने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है.
यह गंभीर मसला, होगी माॅनीटरिंग
जिला परिवहन पदाधिकारी के रहते हुए भीअगर स्कूल नियमों की अनदेखी करते हैं तो यह गंभीर मसला है. अब मैं खुद अब इस मामले में माॅनीटरिंग करूंगा. परिवहन के लिए तय नियमों को नहीं मानने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी.
आदित्य कुमार पोद्दार, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी
कार्रवाई का अधिकार सीबीएसइ को
सीबीएसइ स्कूल की जांच व उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार के स्तर पर हमें कोई निर्देश नहीं है. ऐसे में जिला शिक्षा पदाधिकारी के तौर पर हमारी कोई भूमिका नहीं बनती. यह सच है कि प्राइवेट स्कूल कई नियमों को अनदेखी करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई का अधिकार सीबीएसइ बोर्ड को होता है.
ठाकुर मनोरंजन प्रसाद, जिला शिक्षा पदाधिकारी
सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय नियम
बस के सामने व पीछे स्पष्ट शब्दों में स्कूल बस लिखा होना चाहिए.
अगर स्कूल ने बस किराये पर लिया है, तो उस पर ‘आॅन स्कूल ड्यूटी ‘ लिखा होना चाहिए.
बस में प्राथमिक उपचार बाॅक्स जरूर होना चाहिए.
बस की खिड़कियों में ग्रील लगा होना चाहिए.
बस के अंदर एक अग्निशमन यंत्र जरूरी होना चाहिए.
बस पर स्कूल का नाम व टेलीफोन नंबर जरूर लिखा होना चाहिए.
बस के दरवाजे को लाॅक करने की बेहतर व्यवस्था हो.
स्कूल बैग को ठीक से रखने के लिए सीट के नीचे व्यवस्था होनी चाहिए.किसी भी स्थिति में बच्चों के स्कूल बैग बस से बाहर नहीं हो.
सभी बसों में स्कूल का एक प्रतिनिधि जरूर होना चाहिए.
बसों की अधिकतम रफ्तार 40 किलोमीटर प्रतिघंटा हो.
ड्राइवर के पास लाइसेंस जरूर हो, साथ ही वह नीले रंग की ड्रेस में ड्यूटी करे.
इसपर उसका आइडी कार्ड जरूर हो. बस ड्राइवर के पास उसकी बस पर सवार सभी बच्चों की पूरी जानकारी वाली सूची होनी चाहिए.
