1200 गैंग कुली रहते थे इमरजेंसी के लिए

नगरपालिका में 1200 गैंग कुली इमरजेंसी के लिए रिजर्व रखे जाते थे. जरूरत पड़ने पर इन्हें विशेष जगहों पर लगाया जाता था. इसके साथ ही हर वार्ड में 22-22 के अलावा मेन रोड में अलग से सफाई मजदूर बहाल रहते थे. 50 हजार की आबादी वाले 32 वार्डों में सफाई को लेकर कहीं से शिकायत […]

नगरपालिका में 1200 गैंग कुली इमरजेंसी के लिए रिजर्व रखे जाते थे. जरूरत पड़ने पर इन्हें विशेष जगहों पर लगाया जाता था. इसके साथ ही हर वार्ड में 22-22 के अलावा मेन रोड में अलग से सफाई मजदूर बहाल रहते थे. 50 हजार की आबादी वाले 32 वार्डों में सफाई को लेकर कहीं से शिकायत नहीं मिलती थी. पेयजल को लेकर उस वक्त भी कई मुहल्लों में गरमी के दिनों में हाहाकार होता था. बॉटम नाले के कारण कभी भी जलजमाव की स्थिति का सामना लोगों को नहीं करना होता था. बॉटम नाले से पानी सीधे नदी में जाकर गिरता था.
जितेंद्र मिश्र
गया : नगरपालिका में 1972 से 1983 तक वार्ड नंबर 26 से काउंसिलर रहे महेश सिंह यादव बताते हैं कि उस समय भी नाली व गली की साफ-सफाई की समस्या रहती थी. 1200 गैंग कुलियों को नगरपालिका में इमरजेंसी के लिए रखा जाता था. सबसे अधिक फजीहत कमाऊ शौचालय के कारण होती थी. जगह-जगह से उसे साफ कराने के लिए सूचना नगरपालिका के पास आती थी. इस प्रथा से मुक्ति के लिए बेहतर प्रयास किये गये. श्री यादव ने कहा कि समय पर सफाई व कुजापी व बॉटम नाला के चलते कहीं से जलजमाव की शिकायत नहीं मिलती थी. उन्होंने कहा कि नगरपालिका पूरी तौर से टैक्स के माध्यम से मिलनेवाले पैसों पर चलती थी. इसलिए किसी तरह की कोताही यहां टैक्स वसूली में नहीं की जाती थी.
जमीन व मकान का टैक्स असेसमेंट डिमांड एंड कलेक्शन रजिस्टर के माध्यम से किया जाता था. इसके खिलाफ आपत्ति दर्ज करने के लिए अलग रजिस्टर होते थे. इसके लिए सुनवाई की तिथि तय की जाती थी. सुनवाई तिथि को पारित आदेश कर उसकी एक कॉपी पार्टी को उपलब्ध करा दी जाती थी. कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद हर तरफ से नगरपालिका आश्वस्त हो जाती थी कि अब पार्टी द्वारा टैक्स नहीं दिया जायेगा.
उसके बाद अंत में प्रोपर्टी नीलामी के लिए बोली लगायी जाती थी. ऐसे मामले 1983 में बहुत ही सामने आये हैं. नगरपालिका व नगर निगम की व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए श्री यादव ने कहा कि बॉटम नाला के कारण कई वर्षों से दुर्गाबाड़ी व बारी रोड में जलजमाव से लोग फजीहत झेल रहे हैं. प्रशासन को कोई कड़ा निर्णय लेकर नाला से अतिक्रमण हटाना चाहिए.
इसके साथ ही अंडरग्राउंड नाले की सफाई के लिए अब तक पुरानी पद्धति के अनुसार लेबर को नाले में घुसाया जाता है. इससे कई बार लेबरों के साथ घटना हो चुकी है. आधुनिक युग में बड़े शहरों में मशीन के माध्यम से अंदर ग्राउंड नाले की सफाई करायी जाती है. इस पद्धति को यहां भी प्रयोग करनी चाहिए.

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