बहरहाल, अब पश्चिमी देशों के कुछेक पर्यटकों की आवाजाही की संभावना जतायी जा रही है व अगस्त के अंतिम सप्ताह से श्रीलंका के श्रद्धालुओं के आगमन के साथ बोधगया का पर्यटन सीजन शुरू हो जायेगा. इस बारे में होटल एसोसिएशन बोधगया के महासचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि मार्च के बाद बोधगया का ऑफ सीजन शुरू हो जाता है व बोधगया स्थित विभिन्न होटलों का कारोबार भी मंदा पड़ जाता है. यहां तक कि विभिन्न बौद्ध मठों में भी सन्नाटा पसर जाता है. ट्रैवल्स व बाजार की स्थिति भी सुस्त पड़ जाती है. उन्होंने बताया कि अब अगले पर्यटन सीजन का इंतजार है.
पारा चढ़ने के साथ ही अपने वतन लौटने लगे पर्यटक
बोधगया: मार्च खत्म होने से पहले ही शहर का तापमान चढ़ने के कारण बोधगया में बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में भी गिरावट होने लगी है. ट्रेन के साथ ही हवाई मार्ग से विभिन्न देशों के बौद्ध उपासक अब अपने वतन को लौटने लगे हैं. गया में ज्यादा गरमी पड़ने के कारण मुख्य रूप से कम […]

बोधगया: मार्च खत्म होने से पहले ही शहर का तापमान चढ़ने के कारण बोधगया में बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में भी गिरावट होने लगी है. ट्रेन के साथ ही हवाई मार्ग से विभिन्न देशों के बौद्ध उपासक अब अपने वतन को लौटने लगे हैं. गया में ज्यादा गरमी पड़ने के कारण मुख्य रूप से कम गरमी पड़नेवाले देशों के श्रद्धालु व पर्यटक यहां प्रवास करना मुनासिब नहीं समझते और जल्द ही वापस लौटने को विवश हो जाते हैं. बोधगया में पर्यटकों व बौद्ध श्रद्धालुओं काे भ्रमण करानेवाले टूर ऑपरेटरों का कहना है कि मार्च में ही गरमी ज्यादा तेज हो जाने के कारण ज्यादातर श्रद्धालु वापस लौटने लगे हैं.
एयरपोर्ट सूत्रों से भी जानकारी मिल रही है कि ठंड के दिनों में बोधगया आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु कम से कम एक सप्ताह के अंतराल में ही वापसी करते थे, जबकि इन दिनों दो से तीन दिनों में ही अधिकतर पर्यटकों व श्रद्धालुओं की वापसी देखी जा रही है.