गया: तेहरान (ईरान) यूनिवर्सिटी में उर्दू की प्रोफेसर वफा यजदान मनेश ने कहा है कि तीन तलाक महिलाओं पर जुर्म के समान है और इसे हर हाल में खत्म किया जाना चाहिए.
वह गुरुवार को मिर्जा गालिब कॉलेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ख्वातीन (महिला) मुशायरा में शिरकत करने आयी हुई थीं. उन्होंने ‘प्रभात खबर’ के साथ खास बातचीत में न केवल महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर बेबाकी से राय रखी बल्कि भारत के प्रति अपनी मुहब्बत का भी इजहार किया. उन्होंने कहा कि गया आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा. यजदान मनेश ने कहा कि उन्होंने सुना है कि गया सभी धर्माें का संगम स्थल है. सर्व धर्म समभाव की धरती है. यहां आकर वह इसे महसूस भी कर रही हैं. ईरान में मुशायरे पर उन्होंने कहा कि वहां मुशायरा का रिवाज कम है. जहां तक ख्वातीन मुशायरे की बात है, तो ऐसा मुशायरा और भी नहीं होता. उन्होंने आसरा संस्था की सराहना करते हुए कहा कि वह बेहद शुक्रगुजार हैं कि उन्हें यहां आने का माैका दिया गया. उन्होंने कहा कि यह उनका शौक है. शेर-ओ-शायरी के माध्यम से महिलाएं अपने दिल के दर्द को बयां करती हैं.
तीन तलाक क्या है, मुझे नहीं पता : भारत व ईरान की महिलाओं में समानता व असमानता के सवाल पर उन्होंने कहा कि ईरान की महिलाएं खुशमिजाज होती हैं. जहां तक तहजीब और इनसानियत का सवाल है, तो भारत में यह थोड़ी अधिक होती है. ईरान में मुसलिम महिलाएं जितनी स्वतंत्र हैं, भारत में स्थिति इससे अलग है. तीन तलाक के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ईरान में तीन तलाक जैसा कुछ नहीं है. उन्हें तो पता भी नहीं है कि तीन तलाक होता क्या है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि काेई मजहब इसकी इजाजत नहीं देता. उन्होंने सवाल किया कि ब्याही गयी औरतों को बगैर किसी सबूत के गलत करार देकर कैसे छोड़ा सकता है? यह महिलाओं पर जुर्म के समान है. इसे मिटा देना चाहिए चाहिए.
