गया : अपर जिला व सत्र न्यायाधीश छह धर्मेंद्र कुमार जायसवाल की अदालत में गुरुवार को मोहनपुर थाना कांड संख्या 45/13 के अभियुक्त मो रुस्तम को दस वर्ष जेल की सजा सुनायी गयी. गोडवाली हंटरगंज चतरा निवासी सूचक मो इमरान ने अपनी प्राथमिकी में कहा था कि उसकी बहन शहैला खातून की शादी वर्ष 2011 में डंगरा निवासी मो. रुस्तम से हुई थी. शादी के एक महीने के बाद से ही उसकी ससुराल के लोग एक लाख रुपये दहेज मांगने लगे.
पैसा नहीं होने से उनकी मांग पूरी नहीं की जा सकी, जिस कारण उसका पति व ससुराल के अन्य सदस्यों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. शहैला की सात महीने की एक बेटी भी थी, जिसका नाम रुखसार था. शिकायत में मो इमरान ने बताया था कि आठ फरवरी 2013 को शहैला खातून और उसकी बेटी को जला दिया गया था. उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गयी थी.
आठ लोगों ने दी थी गवाही
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ लोगों ने गवाही दी. मो रजा, हमिला खातून, सोनी खातून व शब्बी परवीन को मुदालय बनाया गया था. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था. अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता हिजाकत हुसैन तथा बचाव पक्ष की ओर से सुबोध तिवारी ने बहस की. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त माे रुस्तम को दस वर्ष की सजा तथा दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी.
