यह कार्यक्रम रमना-पितामहेश्वर माेड़ के पास मैदान में आठ मार्च तक चलेगा. दाेपहर बाद रमना स्थित जैन मंदिर से निकाली गयी घटयात्रा में शामिल लोग पनदरिबां, किरण सिनेमा, शहीद राेड, बजाजा राेड, लाॅ राेड, जीबी राेड से पीरमंसूर हाेते रमना-पितामहेश्वर माेड़ के पास मैदान में बने विशाल पंडाल में गये. इसका नेतृत्व जैन मुनि आचार्य चैत्य सागर जी महाराज, पावापुरी माताजी, शाश्वत माता ने किया. इसमें पंचकल्याणक महाेत्सव के संयाेजक डीके जैन, समाज के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र सेठी ने अहम भूमिका निभायी.
घटयात्रा के साथ मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महाेत्सव शुरू
गया: गया में 56 वर्षाें के बाद जैन समाज के बीच अद्भुत नजारा देखने काे मिल रहा है. गुरुवार काे घटयात्रा के साथ मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महाेत्सव व विश्व कामना महायज्ञ की शुरुआत की गयी. यह कार्यक्रम रमना-पितामहेश्वर माेड़ के पास मैदान में आठ मार्च तक चलेगा. दाेपहर बाद रमना स्थित जैन मंदिर से निकाली […]

गया: गया में 56 वर्षाें के बाद जैन समाज के बीच अद्भुत नजारा देखने काे मिल रहा है. गुरुवार काे घटयात्रा के साथ मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महाेत्सव व विश्व कामना महायज्ञ की शुरुआत की गयी.
आगे चल रही थीं बग्गियां: घटयात्रा के आगे चल रही पांच बग्गियों में पंचकल्याणक के पात्र सवार थे. आगे-आगे केसरिया साड़ी में माथे पर मुकुट व कलश लिये अष्टदेवियां व पांच साैभाग्यवती महिलाएं चल रही थीं. उनके पीछे समाज की महिलाएं केसरिया रंग की साड़ी व पुरुष वर्ग सफेद पायजामा-कुरते व माथे पर चुनरी की पगड़ी (साफा) बांधे नंगे पांव कतारबद्ध चल रहे थे. दाेपहर बाद जब जैन समाज की घटयात्रा निकली, ताे लंबी लाइन में जैन समाज के लाेगाें काे आगे बढ़ते देख लाेग अचंभित थे. जैन समाज की निकली घटयात्रा व झांकी से शहर तीन घंटे के लिए ठहर सा गया था. पूरा माहाैल भक्तिमय था. प्रशासन ने भी ट्रैफिक व सुरक्षा का बेहतर इंतजाम कर रहा था. महिलाएं माथे पर कलश लिये आगे बढ़ रही थीं. भगवान महावीर व भगवान आदिनाथ के जयकारे लगाये जा रहे थे. टीकमगढ़ से आयी टीम देवघाेष बजा रही थी. 20-25 छाेटी-छाेटी कन्याएं वेश बदल कर चल रही थीं.
बिहार के अलावा झारखंड से भी पहुंचे लोग: पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महाेत्सव में शामिल हाेने पटना, रांची, हजारीबाग, काेडरमा, रफीगंज, नवादा व गिरिडीह आदि जिलाें से जैन समाज के महिला-पुरुष आये हैं. घटयात्रा पंडाल में आकर समाप्त हुई. भाेजनशाला का उद्घाटन महेंद्र जी बड़जात्या, खेमचंद्र प्रकाश कुमार सेठी ने किया. दाेनाें प्रतिष्ठाचार्याें के द्वारा ध्वजाराेहण किया गया. मुख्य पंडाल का उद्घाटन शिव कुमार, रवि कुमार सेठी ने किया. उद्घाटन सत्र में आचार्य श्री चैत्य सागर जी महाराज ने पंडाल में माैजूद सभी काे थाली में जूठा नहीं छाेड़ने का संकल्प दिलाया. उन्हाेंने कहा कि भाेजन बड़े यत्न से मिलता है. इसकी इज्जत करें, तभी वह आपके घर में लक्ष्मी वास करेंगी. महाराज ने कहा कि हमारे धर्मग्रंथ व इतिहास गवाह हैं कि अन्न के लिए कितने सुखी-संपन्न व साधन संपन्न लाेगाें काे भाेगना, तड़पना पड़ा है. शाम काे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई.