बोधगया: मगध विश्वविद्यालय मुख्यालय सहित कॉलेजों में चल रहे वोकेशनल कोर्सों में इस वर्ष अब तक नामांकन की प्रक्रिया शुरू नहीं होने के कारण अब यहां ‘जीरो सेशन’ (सत्र) का खतरा मंडराने लगा है. राजभवन से कुछ कोर्सों को चलाने की स्वीकृति, बाकी कोर्सों में राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा सीटों का निर्धारण नहीं किये जाने व नामांकन शुरू करने की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण वोकेशनल कोर्सों की पढ़ाई करानेवाले संस्थानों की परेशानी बढ़ गयी है. स्ववित्तपोषित संस्थान होने के कारण यहां के शिक्षकों के वेतन के साथ अन्य तरह के व्यय को वहन करना अब मुश्किल होता जा रहा है.
उधर, इंटर की परीक्षा पास करने के बाद कॉलेजों में नामांकन न लेकर वोकेशनल कोर्सों में दाखिला लेने के इच्छुक छात्र-छात्राओं को भी इससे बड़ा झटका लगा है. समय गुजरता जा रहा है व अब तक नामांकन को लेकर किसी तरह की सुगबुगाहट देखने को नहीं मिल रही है. जुलाई खत्म होने के बाद भी नामांकन नहीं होने के कारण अब विभिन्न कोर्सों में जीरो सेशन का खतरा मंडराने लगा है. इसके कारण ज्यादातर स्टूडेंट्स दूसरे प्रदेशों में स्थित संस्थानों का रूख कर चुके हैं व उनमें दाखिला लेने लगे हैं. मेधावी स्टूडेंट्स बिहार से पलायन करने लगे हैं व उनके साथ राज्य से बाहर भी करोड़ों रुपये चले जा रहे हैं. लेकिन, मध्यम व गरीब तबके के स्टूडेंट्स के लिए यह संभव नहीं है कि वे दूसरे राज्यों में रह कर कोर्स पूरा कर सकें.
छात्र संगठनों ने भी उठायी थी एडमिशन की मांग
वोकेशनल कोर्सों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं की स्थिति को देखते हुए विभिन्न छात्र संगठनों ने भी पिछले दिनों मगध विश्वविद्यालय प्रशासन से नामांकन शुरू कराने की मांग की थी. लेकिन, एमयू प्रशासन का कहना है कि राजभवन व शिक्षा विभाग द्वारा मांगी गयी सभी जानकारियां उन्हें उपलब्ध करा दी गयी है. अब सीटों का निर्धारण कर नामांकन लेने की स्वीकृति देना सरकार पर निर्भर करता है. हालांकि, पिछले दिनों राजभवन ने एमयू के छह कोर्सों में पढ़ाई शुरू कराने के लिए स्वीकृति देने से मना कर दिया है. संबंधित कोर्सों के संस्थानों के आधारभूत संरचना के बारे में जानकारी मांगी गयी है. बहरहाल, सरकार के शिक्षा विभाग व एमयू प्रशासन के बीच उत्पन्न गतिरोध का खामियाजा यहां से मेधावी व गरीब बच्चे भुगत रहे हैं.
