सुरक्षा व बेहतरी दोनों में तत्पर है सीआरपीएफ : कमांडेंट

गया : केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 159 वीं वाहिनी के जवानों ने जेल परिसर स्थित आपने मुख्यालय में 77 वां स्थापना दिवस मनाया. इस मौके पर कामांडेंट धीरेंद्र वर्मा ने उप कमांडेंट राजेश कुमार,अयोध्या सिंह व संजीव कुमार की उपस्थिति में क्वार्टर गार्ड पर सलामी ली व शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी. कमांडेंट […]

गया : केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 159 वीं वाहिनी के जवानों ने जेल परिसर स्थित आपने मुख्यालय में 77 वां स्थापना दिवस मनाया. इस मौके पर कामांडेंट धीरेंद्र वर्मा ने उप कमांडेंट राजेश कुमार,अयोध्या सिंह व संजीव कुमार की उपस्थिति में क्वार्टर गार्ड पर सलामी ली व शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी.

कमांडेंट धीरेंद्र वर्मा ने जवानों को संबोधित करते हुए सीआरपीएफ के गौरवशाली इतिहास की चर्चा की. उन्होंने कहा कि 27 जुलाई 1939 को अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा काउन रिप्रजेन्टेटिव पुलिस के नाम से सशस्त्र बल का गठन किया गया. इसने देश के अशांत क्षेत्रों में चलाये जानेवाले अभियान में अहम भूमिका निभायी. आजादी के बाद तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटले ने इसे सीआरपीएफ का नाम दिया. वर्तमान में पूरे देश में सीआरपीएफ की लगभग 228 बाटालियन हैं, जो मुख्य रूप से देश के विभिन्न भागों में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा. श्री वर्मा ने कहा कि सीआरपीएफ देश का एक एेसा सशस्त्र बल है, जो कानून-व्यवस्था बनाये रखने में बुनियादी भूमिका के साथ राज्य सरकार की मदद करता है.

उपलब्धियों पर हुई चर्चा : कमांडेंट वर्मा ने गया में तैनात सीआरपीएफ 159 बटालियन की उपलब्धियों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि 159 बटालियन की सभी कंपनियां गया जिले के अति नक्सल प्रभावित व सुदुरवर्ती क्षेत्रों में तैनात हो कर नक्सल विरोधी अभियान चला रही हैं. इसके अलावा 159 बटालियन के जवान समाज की बेहतरी में भी अपना योगदान दे रहे हैं. पितृपक्ष के दौरान फल्गु की सफाई, गरमियों में जगह-जगह पानी के इंतजाम से लेकर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के बीच उनके जरूरत का सामान बांटने तक सीआरपीएफ के जवानों ने कई अच्छे सामाजिक काम किये हैं.
शहीदों को नमन : कुछ दिनों पहले औरंगाबाद-गया जिले के बीच के इलाकों में नक्सलियों के साथ हुए मुठभेड़ में शहीद हुए 10 जवानों को सभी ने नमन किया. सीआरपीएफ अधिकारियों ने कहा कि साथियों को खाने का दुख तो हमेशा रहेगा, लेकिन समाज में अशांति और देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचानेवाले नक्सलियों के खिलाफ सीआरपीएफ, कोबरा ,एसएसबी व जिला पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा. अधिकारियों ने नक्सल अभियान के दबाव में सरेंडर करनेवाले कई हार्डकोर नक्सलियों को लेकर जवानों को बधाई दी.

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