कर्मचारियों व अफसरों की कमी से प्रभार में चल रहा नगर निगम

नगर निगम के कई विभागों में पदाधिकारियों व कर्मचारियों की कमी है. इसकी भरपाई के लिए दूसरे विभागों के पदाधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है़ इससे प्रभार पाये पदाधिकारियों के पास कामकाज का प्रेशर बढ़ गया है़ उन्हें एक साथ दो-दो विभागों का कामकाज देखना पड़ रहा है़ अजय पांडेय/जितेंद्र मिश्र गया : नगर […]

नगर निगम के कई विभागों में पदाधिकारियों व कर्मचारियों की कमी है. इसकी भरपाई के लिए दूसरे विभागों के पदाधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है़ इससे प्रभार पाये पदाधिकारियों के पास कामकाज का प्रेशर बढ़ गया है़ उन्हें एक साथ दो-दो विभागों का कामकाज देखना पड़ रहा है़
अजय पांडेय/जितेंद्र मिश्र
गया : नगर निगम इन दिनों प्रभार में ही चल रहा है. शहर की चार लाख से ज्यादा की आबादी की जरूरी सुविधाओं का ख्याल रखनेवाली शहरी इकाई के अधिकतर विभागों के पद उधार के पदाधिकारियों (प्रभारी) के भरोसे ही चल रहे हैं. नगर निगम के अधिकतर बड़े व जरूरी पद या तो खाली हैं या उनका जिम्मा दूसरे विभाग के अफसर निभा रहे हैं. यह परंपरा लंबे अरसे से चली आ रही है. इसका परिणाम यह है कि अतिरिक्त प्रभार पाये अफसर अपना व अपने विभाग का कामकाज छोड़ कर दूसरे विभाग का कामकाज जैसे-तैसे निबटा रहे हैं.
ऐसे में उनके मूल डिपार्टमेंट का काम पीछे छूट रहा है. अब, बहुत कुछ जरूरी हुआ, तो जल्दी-जल्दी में काम निबटाया जा रहा है. ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ विभागीय इश्यू है और इसका असर केवल अधिकारियों व कर्मचारियों पर अतिरिक्त कामकाज के बोझ को लेकर है. इसका मेजर असर कामकाज को लेकर है, जिसे शहर व शहरवासी भुगत रहे हैं.
मॉनसून से पहले शहरों की नालियों व नालों की जैसे-तैसे साफ-सफाई को देखा जा चुका है.इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप नगर निगम व वार्ड पार्षदों के हवाले से कई बार सुना गया है कि सफाई कर्मचारियों व मजदूरों की कमी से शहर की साफ-सफाई नहीं हो पा रही है. जमादारों की संख्या पर्याप्त नहीं है, जिसकी वजह से साफ-सफाई की मॉनीटरिंग नहीं हो पा रही है. इतना ही नहीं, नगर निगम बोर्ड की बैठकों में इस पर भी बहस करते सुना गया है कि विभागों में जरूरत (कामकाज व कार्यक्षेत्र) के हिसाब से कर्मचारियों के पद ही नहीं बनाये गये हैं, जिससे कामकाज सुचारु ढंग से हो सके.
हर बार पितृपक्ष में होती है दिक्कत : कर्मचारियों की कमी से हर बार पितृपक्ष मेले में दिक्कत होती है. शहर से लेकर विभिन्न घाटों व पिंडवेदियों की साफ-सफाई चरमरा जाती है. शौचालय जाने लायक नहीं रहते और प्याऊ खुद प्यासे रहते हैं. हालांकि, नगर निगम अतिरिक्त सफाई मजदूरों को तैनात करता है, पर नियमित कर्मचारी व मजदूर नहीं रहने से उनसे काम कराने में भी काफी दिक्कत आती है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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