सेल्फ असेसमेंट की होगी जांच

गया : नगर निगम आय का साधन रहते हुए हमेशा जरूरतमंद ही नजर आता है. इस पर काबू पाने के लिए नगर विकास विभाग ने बड़े पैमाने पर कार्ययोजना तैयार की है. इसके तहत पिछले साल जितने भी खाली जमीन व बिल्डिंग का सेल्फ असेसमेंट कर नगर निगम से टैक्स निर्धारित किया गया था, उनका […]

गया : नगर निगम आय का साधन रहते हुए हमेशा जरूरतमंद ही नजर आता है. इस पर काबू पाने के लिए नगर विकास विभाग ने बड़े पैमाने पर कार्ययोजना तैयार की है. इसके तहत पिछले साल जितने भी खाली जमीन व बिल्डिंग का सेल्फ असेसमेंट कर नगर निगम से टैक्स निर्धारित किया गया था, उनका नगर निगम व एक प्राइवेट कंपनी, दोनों मिल कर उसकी जांच करेंगे. इसमें अपनी संपत्ति छिपानेवाले लोगों पर फाइन करते हुए नये ढंग से कर निर्धारण किया जायेगा.

नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव ने नगर निगम को छह जुलाई को भेजे एक आदेश में कहा है कि इस दिशा में जल्द कारगर कदम उठाये जायें. इसके लिए नगर विकास विभाग द्वारा टास्क फोर्स का गठन कर निरीक्षण कराने की योजना बनायी गयी है. निरीक्षण के दौरान जिन अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा लापरवाही सामने आयी, टास्क फोर्स द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए विभाग को अनुशंसा भेजी जायेगी.

इस कार्य में पारदर्शिता बनाये रखने के लिए टास्क फोर्स को होल्डिंग जांच के समय किसी विशेषज्ञ का भी सहयोग लेने का निर्देश नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव ने दिया है. होल्डिंग के सेल्फ असेसमेंट की जांच ‘स्पर’ नामक कंपनी जल्द शुरू करने जा रही है. इससे पहले यह कंपनी नगर निगम में इ-म्यूनिसिपल सेवा शुरू करने के लिए काम कर रही है.

जिन्हें सौंपी गयी है जिम्मेवारी: स्पर नामक प्राइवेट कंपनी को सेल्फ असेसमेंट जांच की जिम्मेवारी सौंपी गयी है. जानकार बताते हैं कि पहले इस कंपनी द्वारा किसी एक वार्ड में अपने काम का प्रयोग किया जायेगा. इसमें अगर सफलता मिलती है, तो यह प्रयोग सभी 53 वार्डों में लागू किया जायेगा. 2015 से पहले नगर निगम इलाके की होल्डिंग से राजस्व की प्राप्ति 3.81 करोड़ रुपये की थी. सेल्फ असेसमेंट के बाद नगर निगम की आय बढ़ कर 12 करोड़ रुपये पहुंच गयी है. सूत्रों की मानें, तो नगर निगम क्षेत्र की होल्डिंग का सही तरीके से जांच कर टैक्स लगाया जाये, तो यहां की आय इतनी जरूर हो जायेगी, जिससे नगर निगम अपनी पूरी खर्च वहन कर सके. आज की स्थिति यह है कि नगर निगम को किसी छोटे बड़े काम के लिए सरकार के पास रुपये का प्रस्ताव भेजना पड़ता है. 2016-17 के बजट में 20 करोड़ 52 लाख 70 हजार रुपये वेतन मद में प्रस्तावित किया गया है. कम से कम यह खर्च नगर निगम आसानी से वहन कर सकता है. तत्काल में नगर निगम के पास यह समस्या हर समय रहती है कि कर्मचारियों के वेतन देने के लिए फंड नहीं है. वेतन मांग को लेकर कर्मचारी हड़ताल कर देते हैं. ऐसी स्थिति में नगर निगम के कई महत्वपूर्ण काम भी बाधित होते हैं.

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