बेलदारी टोले की साफ-सफाई में अब ''भगवान'' बने मददगार
गया: मुहल्ले की साफ-सफाई को लेकर नगर निगम के रवैये से थके-हारे लोग अब देवी-देवताओं की शरण में चले गये हैं. उन्हें पता है कि मुहल्लों की साफ-सफाई के प्रति निगम व कुछ लोगों का रवैया बदलनेवाला नहीं है. हो सकता है कि भगवान के नाम पर थोड़ा सोच-विचार करें. दरअसल, यह वाकया शहर के […]
गया: मुहल्ले की साफ-सफाई को लेकर नगर निगम के रवैये से थके-हारे लोग अब देवी-देवताओं की शरण में चले गये हैं. उन्हें पता है कि मुहल्लों की साफ-सफाई के प्रति निगम व कुछ लोगों का रवैया बदलनेवाला नहीं है.
हो सकता है कि भगवान के नाम पर थोड़ा सोच-विचार करें. दरअसल, यह वाकया शहर के बेलदारी टोले में हनुमान मंदिर के पास का है, जहां पहले लोग मंदिर के ठीक सामने कूड़ा डालते थे. वह भी थोड़ा-मोड़ा नहीं. थोक भाव से. मानो पूरे टोले का यहीं डंपिंग जोन हो. लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया था. मंदिर जानेवाले लोगों को कचरे के ढेर से होकर निकलना पड़ता था. जिनका आसपास घर था, उनके लिए तो जैसे नरक ही था. कभी-कभार कूड़ा डालने की मनाही भी हुई, तो लोग-बाग कहां माननेवाले.
कूड़ा फेंक जाना बदस्तूर जारी रहा. इसी टोले के रहनेवाले दु:खन मिस्त्री, सोनू कुमार व संजय कुमार ने बताया कि कूड़ा फेंकने की यह मुफीद जगह थी. किसी ने छत से कूड़ा डाला, तो किसी ने खिड़की से. दिन भर कुत्तों व आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता था. निगम ने जब डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन शुरू किया, तो उसका भी कोई असर नहीं पड़ा. इसी बीच, इस रोड के भी अच्छे दिन आये और जर्जर हो चुकी सड़क का जीर्णोद्धार करा दिया गया. अब सड़क के लिहाज से सड़क तो साफ हो गयी.
लेकिन, मन में यह भी था कि रोड बन भी जायेगा, तो क्या होगा़ लोगों का कूड़ा डालना तो जारी ही रहेगा. इसी दौरान मन में आया कि क्यों न यहां देवी-देवताओं के पोस्टर लगा दिये जायें. कुछ झंडे-पताके लगा दिये जायें. बस, क्या था मंदिर से कुछ तसवीरें निकाल कर दीवार पर चिपका दिया गया. हनुमानजी का पताका लहरा दिया गया. कूड़ा फेंकने से रोकने का यह तरीका कारगर साबित हुआ. करीब एक महीना होने को है, लोगों ने कूड़ा फेंकना बंद कर दिया है. अब निगम की गाड़ी आती है, तो लोग उसमें कूड़ा डालते हैं.