जैसे-तैसे चल रहा एसएनसीयू फोटो-प्रभावती अस्पताल परिसर में गत 31 दिसंबर को शुरू हुआ है स्पेशल न्यूबाॅर्न केयर यूनिटअब 13 नवजात ही हुए हैं भरती, जिसमें दो बच्चों का जन्म अस्पताल में नहीं हुआ संवाददाता, गयाप्रभावती अस्पताल परिसर में बना स्पेशल न्यूबाॅर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) लंबी प्रतीक्षा के बाद आनन-फानन में गत 31 दिसंबर को चालू करा दिया गया. लेकिन, अब तक एसएनसीयू में मुकम्मल व्यवस्था नहीं की जा सकी है. इसे जैसे-तैसे चलाया जा रहा है. परिणामस्वरूप 16 दिनों में मात्र 13 नवजात (बच्चे) को एसएनसीयू में कुछेक घंटे के लिए भरती किया जा सका है. इनमें से मात्र दो नवजात ऐसे हैं, जिनका जन्म प्रभावती अस्पताल में हुआ नहीं है. यानी भरती किये गये 13 नवजात में से 11 का जन्म ही प्रभावती अस्पताल में हुआ है. और तो और विशेषज्ञ डॉक्टर व स्टॉफ नर्स के अभाव में बेहतर इलाज के लिए तीन नवजात को मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर करना पड़ा है.नियंत्री पदाधिकारी भी स्पष्ट नहींएसएनसीयू का नियंत्री पदाधिकारी कौन हैं, अब तक स्पष्ट नहीं है. इसको लेकर प्रतिनियुक्त डॉक्टर व स्टाफ नर्स में ऊहापोह की स्थिति है. आमतौर पर माना जा रहा है कि एसएनसीयू सदर अस्पताल (जयप्रकाश नारायण अस्पताल) का हिस्सा है. इसलिए, जेपीएन के अस्पताल उपाधीक्षक नियंत्री पदाधिाकरी हैं. डॉक्टर व स्टाफ नर्सों की प्रतिनियुक्ति भी सदर अस्पताल में करते हुए उन्हें एसएनसीयू में भी कार्य करने का निर्देश दिया गया है. दूसरी ओर एसएनसीयू की देखरेख की जिम्मेवारी प्रभावती अस्पताल के अधीक्षक को दी गयी है. लेकिन, डॉक्टर एक दिन भी प्रभावती अस्पताल में उपस्थिति दर्ज करने को तैयार नहीं हुए. स्टाफ नर्स भी छह जनवरी तक ही अस्पताल में उपस्थिति दर्ज करायी हैं. इसके बाद से सभी एसएनसीयू में ही उपस्थिति बना रही हैं. एसएनसीयू में प्रतिनियुक्त डॉ त्रिभुवन प्रसाद की ड्यूटी दोपहर बाद दो बजे से रात के आठ बजे तक थी, लेकिन वे नहीं आये. पूछने पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ एनके सिंह उनके बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया. दूसरी ओर, प्रभावती अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ यूएन पंजीयार ने बताया कि एसएनसीयू में प्रतिनियुक्त डॉ त्रिभुवन प्रसाद व डॉ राजेश गुप्ता उनके नियंत्रण में नहीं हैं. ऐसे में कोई भी जानकारी सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ही दे सकते हैं. सिविल सर्जन डॉ कृष्णमोहन पूर्वें ने बताया कि डॉ त्रिभुवन प्रसाद के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है कि वह छुट्टी पर हैं या नहीं.नवजात को भरती करने का पूरा हो रहा कोरमशुक्रवार को एसएनसीयू में एक भी नवजात भरती नहीं मिला. इससे पहले भी प्रभात खबर संवाददाता दो बार इसका जायजा ले चुके हैं, लेकिन एसएनसीयू में कभी भी नवजात भरती नहीं मिला. ऐसे में भरती किये गये नवजातों पर ही सवाल खड़ा होना स्वभाविक है. कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रभावती अस्पताल में जन्म लेने वाले हर नवजात का रजिस्ट्रेशन एसएनसीयू के इनडोर रजिस्टर में करके कोरम पूरा किया जा रहा है. यदि ऐसा नहीं है, तो अस्पताल के बाहर से एसएनसीयू में भरती करने के लिए नवजात क्यों नहीं लाये जा रहे हैं?साफ-सफाई का भी इंतजाम नहींएसएनसीयू में साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं किया गया है. ऐसे में नवजात के समुचित देखभाल की कल्पना कैसे की जा सकती है. जेनेरेटर सेट तो लगा दिया गया है, लेकिन ऑपरेटर, लॉग बुक व डीजल आदि का प्रबंध नहीं किया जा सका है. प्रभावती अस्पताल प्रबंधक द्वारा एसएनसीयू को किसी प्रकार चलाया जा रहा है.चार डॉक्टर व 13 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृतएसएनसीयू में शिशु रोग विशेषज्ञ व फिजिशियन डॉक्टर के चार, स्टाफ नर्स के 13 व स्पोर्टिंग स्टाफ के चार पद स्वीकृत हैं, ताकि उनकी समुचित देखरेख में नवजातों को गरमी व सांस जैसी बुनियादी सुविधाएं व बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करायी जा सके और नवजात मृत्यु दर को कुछ हद तक कम किया जा सके. लेकिन, एसएनसीयू में मात्र दो डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति की गयी है. इनमें शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश गुप्ता व जेनरल फिजिशियन डॉ त्रिभुवन प्रसाद हैं. इन्हें भी नवजात की देखरेख की कोई विशेष ट्रेनिंग नहीं दी गयी है. उधर, जिन 10 स्टॉफ नर्सों की पोस्टिंग की गयी है, उन सभी की नियुक्ति मई 2015 में हुई है. तब से उन्हें अब तक वेतन भुगतान नहीं किया गया है और न ही कोई ट्रेनिंग दी गयी है.
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