आतंकी तुम बाज आयो... हमारे सैनिक हैं जांबाज

आतंकी तुम बाज आयो… हमारे सैनिक हैं जांबाजजिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या का आयोजनसंवाददाता, गयाजिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में रविवार को काव्य चक्र के तहत काव्य संध्या आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता डॉ रामकृष्ण ने की. काव्य संध्या की शुरुआत नन्ही बच्ची वैष्णवी के गीत ‘मेरे मसीहा मेरे खुदा, तुम न होना […]

आतंकी तुम बाज आयो… हमारे सैनिक हैं जांबाजजिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या का आयोजनसंवाददाता, गयाजिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में रविवार को काव्य चक्र के तहत काव्य संध्या आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता डॉ रामकृष्ण ने की. काव्य संध्या की शुरुआत नन्ही बच्ची वैष्णवी के गीत ‘मेरे मसीहा मेरे खुदा, तुम न होना मुझसे जुदा.’ से हुई. गजेंद्र लाल अधीर ने विरह गीत ‘देख कर चांद हंसता रहा रात भर, माननि आज रूठी रही रात भर’ गाया. नंदकिशोर सिंह ने कहा, ‘मानव मानव एक समान, गौर वर्ण या पीत–श्याम.’ संजय सहियावी ने भोजपुरी गीत ‘देखी के रहिया पथराइल नैना, न जाने तू कहिआं घर अइबऽ’ गाया. संतोष कुमार क्रांति ने अपनी कविता में कहा, ‘जिंदगी ताश के पतों की तरह बिखर जाती है, जब चोट अपनों की तरफ से की जाती है.’ डॉ अब्दुल मनान अंसारी ने ‘मां ने आंचल में मुहब्बत से छुपाया सबको, अब क्या किया मां के लिए हमने जमानेवालों?’ नामक गजल गायी. विशधर शंकर ने कहा कि ले यम पकड़ मेरा हाथ. ले चल मुझे कहीं भी. खालिक हुसैन परदेशी ने नये साल पर गाया, ‘जख्में दहशत पे तस्सली की दवा क्या रखें, दर्द को अपने तबस्सुम में छुपा क्या रखें. अब जिधर देखें कयामत ही नजर आती है, हम नये साल से उम्मीदें वफा क्या रखें.’ मुकेश कुमार सिन्हा ने आतंकी हमले पर कहा कि आतंकी तुम आओ अब बाज. मत भूलो, हमारे सैनिक हैं जांबाज. सुरेंद्र पांडेय सौरभ ने श्रृंगार गीत गाया-ऐतन सजन सुनाएल कचनार मुस्कुराएल. मोजर लगल टिकोरा, दरियन में कुलबुलाएल. अरुण हरलीवाल ने प्रेम पर कहा कि प्रेम औषध, प्रेम ऊर्जा, प्रेम श्रम की प्रेरणा. जिंदगानी खूबसूरत प्रेम बिन होती कहां? सुमंत ने अपनी हास्य कविता में कहा कि भगवान हे विनती तोहरा से, हमरा एगो साली दऽ. डॉ राम सिंहासन सिंह ने कैसे तुझे पुकारूं कविता पढ़ी. डॉ रामकृष्ण ने आतंकी हमले पर कहा-दीवारों से सुरक्षा हो पायेगी कभी घरों की. पहरेदारी में ही जब इमान बिकेगा औने-पौने. काव्य संध्या में राजीव रंजन के संपादन में प्रकाशित लघु पत्रिका आलोक का भी विमोचन किया गया. आलोक एक साहित्यिक पत्रिका है, जिसमें कविता-कहानी के अलावा साहित्यिक निबंध भी हैं. इस मौके पर सुमंत, डॉ सुधांशु, नवीन कुमार, संजीत कुमार, विनोद, उदय सिंह, जयराम सत्यार्थी, डॉ राकेश कुमार सिन्हा रवि, रामावतार सिंह, चंद्रदेव केशरी, सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र व सरवर खान आदि उपस्थित थे.

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