गया : साहित्य महापरिषद, ने अशोक विहार कालनी स्थित कार्यालय-कक्ष में सोमवार को साहित्य व उसके दायित्व’ विषय पर विचार-गोष्ठी व कवि-गोष्ठी सह मुशायरे का आयोजन किया. जिसकी अध्यक्षता डॉ रामसिंहासन सिंह ने की. जिसमें प्रस्तावित विषय पर डॉ सिंह ने कहा कि आज मूल्यहीन समाज के निर्माण में साहित्य के अवमूल्यन का बहुत बड़ा योगदान है.
पर्वतों का पानी है जोश में जवानी है...
गया : साहित्य महापरिषद, ने अशोक विहार कालनी स्थित कार्यालय-कक्ष में सोमवार को साहित्य व उसके दायित्व’ विषय पर विचार-गोष्ठी व कवि-गोष्ठी सह मुशायरे का आयोजन किया. जिसकी अध्यक्षता डॉ रामसिंहासन सिंह ने की. जिसमें प्रस्तावित विषय पर डॉ सिंह ने कहा कि आज मूल्यहीन समाज के निर्माण में साहित्य के अवमूल्यन का बहुत बड़ा […]

हम आधुनिक साहित्य के नाम पर कूड़ा-करकट का ढेर इकठ्ठा कर रहे हैं, ऐसी बात नहीं कि आज हीरे नहीं निकल रहे, लेकिन उनकी चमक बहुत हद तक कूड़े के बीच दब रही है. दूसरे सत्र में कवि-गोष्ठी की शुरुआत आसिफ अली ने की जिसमें पड़ा रहने दे मुझको किसी कोने में ऐ माली मैं कांटा ही सही लेकिन पला हूं. इस गुलिस्तां में रचना सुनायी.
वहीं एमए फातमी जब दुखों का पहाड़ टूट पड़े कविता सुनायी. राजीव रंजन अपनी ‘ बेईमान बदरा’ कविता पढ़ी. रामकृष्ण मिश्र पर्वतों का पानी है जोश में जवानी है, सरहदों के सीने पर गुंज रही कहानी है कविता सुना कर वाहवाही लूटी. इसके अलावा कन्हैया लाल मेहरवार, नंद किशोर सिंह, डॉ सुल्तान अहमद, निरंजन श्रीवास्तव, संजय सहियावी, गजेंद्र लाल अधीर, आयुष तिवारी, अविनाश तिवारी, विनय सिंह इत्यादि ने भी अपनी रचनाएं पढीं.