जिला पर्षद अध्यक्ष का दुखड़ा
गया : जिला पर्षद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह उपविकास आयुक्त द्वारा जिला पर्षद के कार्यों की जानकारी नहीं देने से जिला पर्षद की अध्यक्ष लक्ष्मी देवी काफी मर्माहत हैं. इस मामले को लेकर उन्होंने बताया कि बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 69 (ख), बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 69 (घ), घर व अधिनियम की धारा 88 के तहत उपविकास आयुक्त को जिला पर्षद के अध्यक्ष को सभी कार्यों व संचिकाओं की जानकारी देने का प्रावधान है. बावजूद किसी तरह की संचिका व कार्यों की जानकारी उपविकास आयुक्त नहीं देते हैं. जानकारी के अभाव में जिला पर्षद में कौन सा काम हो रहा है, कौन सा काम लंबित है, इसकी जानकारी नहीं हो पाती है.
उन्होंने बताया कि उक्त नियमों के तहत जिला पर्षद अध्यक्ष को अधीक्षण, नियंत्रण व पर्षद के पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर भी नियंत्रण रखने के लिये शक्ति प्रदत है. बावजूद उक्त नियमों की अवहेलना जिला पर्षद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह उपविकास आयुक्त व पर्षद के कर्मचारियों द्वारा आज भी की जा रही है. उन्होंने राज्य सरकार व पंचायती राज विभाग से उपविकास आयुक्त व पर्षद कर्मियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की मौखिक गुहार लगायी है.
इधर, उपविकास आयुक्त किशोरी चौधरी ने बताया कि नीतिगत निर्णय की जानकारी जिला पर्षद अध्यक्ष को हमेशा दी जाती है. बोर्ड की बैठक में भी अंतिम निर्णय अध्यक्ष की सहमति के बाद ही लिया जाता है. उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग के नियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन किया जा रहा है.
