गया : सरकार की ओर से हर वक्त दावा किया जाता है कि किसी गरीब को इलाज के अभाव में मरने नहीं दिया जायेगा, पर जमीनी हकीकत इससे अब तक परे ही है. जिले में हीमोफीलिया ‘बी’ के करीब 22 मरीज हैं. इनमें 21 बच्चे व एक वयस्क शामिल हैं. इस बीमारी में इलाज का एकमात्र उपाय इंजेक्शन ही होता है.
यह इंजेक्शन पिछले सात माह से मगध मेडिकल अस्पताल में उपलब्ध नहीं है. इस बीमारी से पीड़ित बच्चे के पिता मोहम्मद इम्तेयाज बताते हैं कि इंजेक्शन आसानी से बाजार में उपलब्ध नहीं है. अगर कहीं उपलब्ध भी है, तो इसका दाम इतना होता है कि खरीदना सबके लिए संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि बाजार में एक इंजेक्शन का कीमत 13 हजार रुपये है. उनके नौ वर्षीय बेटे मोहम्मद इमरान व चार वर्षीय बेटा अहमद रजा हीमोफीलिया ‘बी’ से पीड़ित हैं.
छोटे बेटे की हालत ऐसी है कि कई दिनों से वह रातभर दर्द से सो नहीं पा रहा है. इतना ही नहीं उसका अंदरूनी रक्त रिसाव से दोनों पैर फूल गये हैं. कई बार मगध मेडिकल अधीक्षक से इस संबंध में बात की. लेकिन, उनका एक ही जवाब सात महीने से मिल रहा है कि फैक्टर नाइन के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है. इतना ही नहीं पीएमसीएच व मुजफ्फरपुर अस्पताल में भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं.
हीमोफीलिया के होते हैं स्टेज यह एक घातक बीमारी है. हीमोफीलिया ‘ए’ में फैक्टर-8 की कमी होती और हीमोफीलिया ‘बी’ में फैक्टर-9 की कमी होती है. दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी हैं. हीमोफीलया ‘ए’ का 10 हजार लोगों में से एक मरीज पाया जाता है व हीमोफीलिया ‘बी’ के 40 हजार लोगों में से एक मरीज पाया जाता है.
हीमोफीलिया के लक्षण इसके लक्षण हल्के से लेकर बहुत गंभीर तक हो सकते हैं. ये खून में मौजूद थक्कों के स्तर पर निर्भर करता है. लंबे समय तक रक्तस्राव (रक्त बहाव) के अलावा भी इस बीमारी के दूसरे लक्षण होते हैं. नाक से लगातार खून बहता है. मसूड़ों से खून निकलता है. त्वचा आसानी से छिल जाती है. शरीर में आंतरिक रक्तस्राव के कारण जोड़ों में दर्द होता है. कई बार हीमोफीलिया में सिर के अंदर भी रक्तस्राव होता है. इसमें बहुत तेज सिरदर्द, गर्दन में अकड़न के साथ उल्टी आती है.
इसके अलावा धुंधला दिखना, बेहोशी और चेहरे पर लकवा होने जैसे लक्षण भी होते हैं. हालांकि, ऐसा बहुत कम मामलों में होता है. हीमोफीलिया के तीन स्तर होते हैं. हल्के स्तर में शरीर में थक्के के बनाने वाले घटक पांच से 50 प्रतिशत तक होते हैं. मध्यम स्तर में ये घटक एक से पांच प्रतिशत होते हैं और गंभीर स्तर के एक प्रतिशत से भी कम होते हैं.
