गया : नगर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों का लापरवाही से रिश्ता बहुत पुराना दिखता है. ताजा मामला सामने आया है कि कई दशक गुजरने के बाद भी शहर के विभिन्न इलाकों में बनायी गयी दुकानों का आवंटन लोगों को नहीं किया जा सका है. इसके लिए कई लोग हाइकोर्ट की शरण में पहुंच गये हैं. कोर्ट के आदेश के बाद भी निगम के अधिकारी ने अब तक कोई पहल नहीं की है. बताया जाता है कि निगम ने आमदनी बढ़ाने के लिए कई जगहों पर दुकान बनवाये थे.
इसमें कुछ जगहों पर बेरोजगार लोगों को रोजगार के लिए दुकान आवंटित कराये गये. लेकिन, कई जगहों पर दुकान के लिए सिक्यूरिटी जमा कराने के बाद भी वर्षों गुजर गयेेेे पर अब तक कब्जा नहीं दिलाया जा सका है. कई जगहों पर ऐसी भी स्थिति है कि दुकान बनने के बाद लोगों ने अवैध ढंग से कब्जा कर लिया. कब्जाधारियों से दुकान खाली करा कर आवंटन के लिए अब तक विज्ञापन भी नहीं निकाला जा सका है.
इसमें एपी कॉलोनी स्थित इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के अंदर वाले हिस्से में बनी 10 दुकानों पर कब्जा किये जाने की बात सामने आ रही है. स्थानीय वार्ड पार्षद गजेंद्र सिंह ने कहा कि दुकान से कब्जा हटाने व उसे आवंटित करने की मांग कई बार बोर्ड की बैठक में कर चुके हैं. पर अधिकारी ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की. कब्जाधारी दुकान का किराया भी निगम को नहीं देते हैं. इससे जुदा मामला एसएसपी कोठी के सामने बने निगम की 16 दुकानों पर कब्जा का भी है. यहां लोग आगे की दुकान में मुर्गी फार्म व अंदर वाली दुकान में आवास के रूप में कब्जा कर इस्तेमाल कर रहे हैं.
दुकान बनाने के लिए जमीन देने के बाद लगायी रोक
गांधी मैदान के चर्च रोड से दक्षिण-पूरब में दो रैक दुकान (40/40)(30 वर्षों के लिए) देने के लिए कुजापी के राजेंद्र प्रसाद से प्रति दुकान एक लाख 30 हजार रुपये यानी दो लाख 60 हजार रुपये निगम में उस वक्त के प्रशासक एसएम राजू के आदेश से पांच दिसंबर 1997 को जमा कराये गये थे. रुपये जमा करने के बाद उस वक्त दुकान बनाने का काम शुरू किया गया.
लेकिन, गांधी मैदान से अतिक्रमण हटाने के लिए हाइकोर्ट के आदेश के बाद इनकी दुकान काे भी निर्माण अवधी में ही तोड़ दिया गया. इसके बाद कई बार प्रशासक व नगर आयुक्त से आग्रह करने के बाद भी दुकान के लिए जमीन नहीं दी गयी. बताया जाता है कि सभी जगह से हार कर राजेंद्र प्रसाद हाइकोर्ट की शरण में गये.
हाइकोर्ट ने 11 दिसंबर 2015 को आदेश दिया कि नगर निगम के अधिकारी इस मामले में दो माह के अंदर उचित फैसला लें, ताकि आवेदक को न्याय मिल सके. इसके बाद भी नगर निगम के अधिकारी ने कोई फैसला नहीं लिया.
फिर हो रही दुकान बनाने की बात
कठोकर तालाब व गुरुद्वारा डोमटोली के पास निगम की खाली जमीन में दुकान बनाने का प्रस्ताव भी निगम बोर्ड ने पिछले दिनों पारित किया है. निगम बोर्ड के प्रस्ताव में कहा गया है कि दोनों जगहों पर बेरोजगारों को दुकान के लिए जमीन का आवंटन एक निर्धारित किराया व सिक्यूरिटी मनी के साथ किया जायेगा. इसमें कठोकर तालाब के पास दुकान बनाने के लिए नक्शा भी तैयार कर लिया गया है. पिछली बैठक में ही संबंधित इंजीनियर को मेयर वीरेंद्र कुमार, डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव व नगर आयुक्त डॉ ईश्वर चंद्र शर्मा ने गुरुद्वारा डोमटोली के पास खाली पड़ी जमीन में दुकान बनाने के लिए नक्शा तैयार करने का निर्देश दिया गया है.
दुकान वाली जगह पर पार्क बनाने का प्रस्ताव
सूत्र बताते हैं कि गांधी मैदान के बाहरी हिस्से, जहां पर दुकान बनायी जा रही थी, वहां अब पार्क बनाने का प्रस्ताव किया गया है. बीते 29 अक्तूबर को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में राजेंद्र प्रसाद को दो रैक दुकान गया-डोभी रोड में देने का फैसला लिया गया है. प्रसाद द्वारा नगर आयुक्त को एक बार फिर आवेदन देकर कहा गया है कि दुकान के लिए जगह ऐसी जगह दी जाये जहां पर दोबारा फिर सरकारी डंडा नहीं चले.
इसके साथ ही एसपी कोठी के पास बने 1997 में 16 दुकानाों में दो दुकान बबीता देवी के नाम से आवंटित किये गये थे. इनसे हजारों रुपये सिक्यूरिटी भी जमा करा लिये गये. लेकिन, अब तक इन्हें दुकान पर कब्जा नहीं दिलाया जा सका है. बबीता देवी ने दुकान पर कब्जा दिलाने के लिए हाइकोर्ट में अपील की है. जानकारों का कहना है कि दोनों को अगर सूद के साथ पैसा वापस करना पड़ा, तो निगम को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा.
कई जगहों पर बनायी गयीं दुकानें पर किसी को नहीं की गयीं अलॉट
गया : नगर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों का लापरवाही से रिश्ता बहुत पुराना दिखता है. ताजा मामला सामने आया है कि कई दशक गुजरने के बाद भी शहर के विभिन्न इलाकों में बनायी गयी दुकानों का आवंटन लोगों को नहीं किया जा सका है. इसके लिए कई लोग हाइकोर्ट की शरण में पहुंच गये हैं. कोर्ट के आदेश के बाद भी निगम के अधिकारी ने अब तक कोई पहल नहीं की है. बताया जाता है कि निगम ने आमदनी बढ़ाने के लिए कई जगहों पर दुकान बनवाये थे.
इसमें कुछ जगहों पर बेरोजगार लोगों को रोजगार के लिए दुकान आवंटित कराये गये. लेकिन, कई जगहों पर दुकान के लिए सिक्यूरिटी जमा कराने के बाद भी वर्षों गुजर गयेेेे पर अब तक कब्जा नहीं दिलाया जा सका है. कई जगहों पर ऐसी भी स्थिति है कि दुकान बनने के बाद लोगों ने अवैध ढंग से कब्जा कर लिया. कब्जाधारियों से दुकान खाली करा कर आवंटन के लिए अब तक विज्ञापन भी नहीं निकाला जा सका है.
इसमें एपी कॉलोनी स्थित इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के अंदर वाले हिस्से में बनी 10 दुकानों पर कब्जा किये जाने की बात सामने आ रही है. स्थानीय वार्ड पार्षद गजेंद्र सिंह ने कहा कि दुकान से कब्जा हटाने व उसे आवंटित करने की मांग कई बार बोर्ड की बैठक में कर चुके हैं. पर अधिकारी ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की. कब्जाधारी दुकान का किराया भी निगम को नहीं देते हैं.
इससे जुदा मामला एसएसपी कोठी के सामने बने निगम की 16 दुकानों पर कब्जा का भी है. यहां लोग आगे की दुकान में मुर्गी फार्म व अंदर वाली दुकान में आवास के रूप में कब्जा कर इस्तेमाल कर रहे हैं.
दुकान बनाने के लिए जमीन देने के बाद लगायी रोक
गांधी मैदान के चर्च रोड से दक्षिण-पूरब में दो रैक दुकान (40/40)(30 वर्षों के लिए) देने के लिए कुजापी के राजेंद्र प्रसाद से प्रति दुकान एक लाख 30 हजार रुपये यानी दो लाख 60 हजार रुपये निगम में उस वक्त के प्रशासक एसएम राजू के आदेश से पांच दिसंबर 1997 को जमा कराये गये थे. रुपये जमा करने के बाद उस वक्त दुकान बनाने का काम शुरू किया गया.
लेकिन, गांधी मैदान से अतिक्रमण हटाने के लिए हाइकोर्ट के आदेश के बाद इनकी दुकान काे भी निर्माण अवधी में ही तोड़ दिया गया. इसके बाद कई बार प्रशासक व नगर आयुक्त से आग्रह करने के बाद भी दुकान के लिए जमीन नहीं दी गयी. बताया जाता है कि सभी जगह से हार कर राजेंद्र प्रसाद हाइकोर्ट की शरण में गये.
हाइकोर्ट ने 11 दिसंबर 2015 को आदेश दिया कि नगर निगम के अधिकारी इस मामले में दो माह के अंदर उचित फैसला लें, ताकि आवेदक को न्याय मिल सके. इसके बाद भी नगर निगम के अधिकारी ने कोई फैसला नहीं लिया.
फिर हो रही दुकान बनाने की बात
कठोकर तालाब व गुरुद्वारा डोमटोली के पास निगम की खाली जमीन में दुकान बनाने का प्रस्ताव भी निगम बोर्ड ने पिछले दिनों पारित किया है. निगम बोर्ड के प्रस्ताव में कहा गया है कि दोनों जगहों पर बेरोजगारों को दुकान के लिए जमीन का आवंटन एक निर्धारित किराया व सिक्यूरिटी मनी के साथ किया जायेगा.
इसमें कठोकर तालाब के पास दुकान बनाने के लिए नक्शा भी तैयार कर लिया गया है. पिछली बैठक में ही संबंधित इंजीनियर को मेयर वीरेंद्र कुमार, डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव व नगर आयुक्त डॉ ईश्वर चंद्र शर्मा ने गुरुद्वारा डोमटोली के पास खाली पड़ी जमीन में दुकान बनाने के लिए नक्शा तैयार करने का निर्देश दिया गया है.
दुकान वाली जगह पर पार्क बनाने का प्रस्ताव
सूत्र बताते हैं कि गांधी मैदान के बाहरी हिस्से, जहां पर दुकान बनायी जा रही थी, वहां अब पार्क बनाने का प्रस्ताव किया गया है. बीते 29 अक्तूबर को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में राजेंद्र प्रसाद को दो रैक दुकान गया-डोभी रोड में देने का फैसला लिया गया है. प्रसाद द्वारा नगर आयुक्त को एक बार फिर आवेदन देकर कहा गया है कि दुकान के लिए जगह ऐसी जगह दी जाये जहां पर दोबारा फिर सरकारी डंडा नहीं चले. इसके साथ ही एसपी कोठी के पास बने 1997 में 16 दुकानाों में दो दुकान बबीता देवी के नाम से आवंटित किये गये थे.
इनसे हजारों रुपये सिक्यूरिटी भी जमा करा लिये गये. लेकिन, अब तक इन्हें दुकान पर कब्जा नहीं दिलाया जा सका है. बबीता देवी ने दुकान पर कब्जा दिलाने के लिए हाइकोर्ट में अपील की है. जानकारों का कहना है कि दोनों को अगर सूद के साथ पैसा वापस करना पड़ा, तो निगम को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा.
