गया : नगर निगम द्वारा प्राइवेट कंपनी को दी गयी टैक्स वसूली की जिम्मेदारी निगम के गले की फांस बनती जा रही है. प्राइवेट कंपनी द्वारा जिम्मेदारी संभाले जाने के बाद से निगम की जबर्दस्त लापरवाहियां उजागर होने लगी हैं. निगम को अब तक यह भी पता नहीं है कि मानपुर में चल रही दो बड़ी फैक्टरियां उसके अधीन है या फिर किसी और के जिम्मे है.
वार्ड नंबर 51 में दो फैक्टरी ऐसे हैं जिनसे टैक्स वसूली अब तक निर्धारण ही नहीं हुआ है. कारण निगम की जानकारी में अबतक नहीं होना बताया जा रहा है. स्थानीय वार्ड पार्षद मनोज कुमार का कहना है कि वार्ड में दो स्लीपर फैक्टरी के ऊपर टैक्स निर्धारण के लिए कई बार निगम के अधिकारी व बोर्ड की बैठक में मामला को उठाया पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
निगम के अधिकारी हर बार सिर्फ जल्द ही टैक्स निर्धारण किये जाने की सिर्फ बातें करते हैं. निगम के तय मानकों के तहत टैक्स जोड़ा जायेगा, तो लाखों रुपये बकाया फैक्टरियों के ऊपर निकल आयेगा.
सूत्रों का कहना है कि नगर निगम के स्थानीय टैक्स कलेक्टर अब तक निगम के अधिकारी को यह कहते रहे हैं कि फैक्टरी का रकबा निगम के अधीन नहीं बल्कि पंचायत में आता है. इधर मानपुर सीओ जितेंद्र पांडेय का कहना है कि वार्ड 51 स्थित दोनों स्लीपर फैक्टरियां नगर निगम के अधीन आती हैं. फैक्टरियों की सीमा समाप्त होने के बाद से ही बारागंधार पंचायत शुरू होती है.
खास बात यह भी है कि हाल के दिनों में मैप माई इंडिया द्वारा किये गये सर्वे में भी उन दोनों फैक्टरियों की दीवार पर होल्डिंग प्लेट लगायी गयी हैं. सूत्रों का यह भी कहना है कि मानपुर व अन्य इलाकों में कई छोटी-बड़ी फैक्टरियां चलायी जा रही है. यहां से भी निगम को या तो अब तक रेसिडेंसियल टैक्स मिला है या फिर पूरा ही टैक्स ही गायब है. इस इलाके में दो दर्जन से अधिक फ्लावर मिल व आरा मशीन हैं.
अब सब कुछ प्राइवेट कंपनी के जिम्मे : पहले के बकाया व नये की वसूली करने की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी को नगर निगम द्वारा सौंपी गयी है. निगम में यह चर्चा होने लगी है कि निगम के कर्मचारी अगर पहले का बकाया वसूल लेते, तो बकाया वसूली पर प्राइवेट कंपनी को कमीशन नहीं देना पड़ता. इतना ही नहीं निगम के जमीन पर बने करीब 100 से अधिक दुकानें जो किराये पर दिये गये हैं.
उनसे वसूली की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी को दे दी गयी है जबकि यह काम निगम का कोई भी कर्मचारी कर सकता था. सूत्रों का कहना है कि प्राइवेट कंपनियों को जिम्मेदारी दिये जाने के पीछे बड़ा राज छिपा है. खास बात यह है कि 2014 में असेसमेंट कराया गया था. उस समय राजस्व पदाधिकारी विजय कुमार थे. किये गये असेसमेंट का सत्यापन राजस्व पदाधिकारी और टैक्स कलेक्टर को करना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया. यही नहीं विजय कुमार को रिटायर होने के बाद उन्हें संविदा पर नियुक्ति देते हुए राजस्व पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी गयी है.
जांच कर होगी कार्रवाई
अफसोस की बात है कि मानपुर में कई फैक्ट्रियों पर अब तक टैक्स का निर्धारण ही नहीं हुआ है. जांच कर इसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी व अधिकारी पर कार्रवाई का प्रस्ताव पारित किया जायेगा. प्राइवेट कंपनी के जिम्मेदारी संभालने के बाद आशा दिख रही है कि निगम के राजस्व में बढ़ोतरी होगी.
वीरेंद्र कुमार, मेयर
निगम कार्यालय परिसर में बढ़ रहा अतिक्रमण का दायरा
गया : नगर निगम के पास पूरे शहर से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी है, पर उसके खुद के कार्यालय परिसर में ही अतिक्रमण वर्षों से फैला है और अब इसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है. अतिक्रमण के कारण ही कार्यालय की नयी बिल्डिंग (अशोक सम्राट भवन) बनाने का काम शुरू नहीं किया जा सका है. ऐसे में शहर को अतिक्रमणमुक्त करने की कल्पना ना ही की जाये, तो बेहतर होगा. जानकारी के अनुसार, कुछ वर्ष पहले कुछ लोगों ने निगम कार्यालय के पीछे कैंपस में एक दर्जन झोंपड़ियां बना लीं.
अधिकारियों ने कई बार नोटिस दिया. यहां तक कि जमीन खाली करने के लिए उनलोगों को पैसे भी दिये गये, पर कोई फायदा नहीं हुआ. अब तो इन झोंपड़ियों में रहनेवाले एक ने वहीं अपनी कबाड़ी की दुकान खोल ली है. कार्रवाई नहीं होता देख अतिक्रमणकारी धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ाने में लगे हुए हैं. कई बार बोर्ड में प्रस्ताव पारित कर यहां से झोंपड़ियों को हटाने की बात कही गयी. दो-तीन बार पुलिस फोर्स व मजिस्ट्रेट भी झोंपड़ियों को हटाने के लिए वहां पहुंचे पर कार्रवाई सिफर ही रही. अब अतिक्रमणकारी मांग करने लगे हैं कि तब ही यहां से जमीन खाली करेंगे, जब निगम से इन्हें मकान बना कर मिलेगा.
