देश में भ्रष्टाचार की बयार, गांधीजी होते, तो करा देते सात समुंदर पार

गया : काफी संघर्ष के बाद देश काे अंग्रेजाें से मुक्ति मिली. देश काे आजादी दिलाने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अहम भूमिका काे देश कभी भुला नहीं सकता आैर सबसे बड़ी बात, ताे यह कि हथियाराें के बल पर नहीं बल्कि अवज्ञा, असहयाेग व अहिंसा काे अपना कर उन्हाेंने देश काे अंग्रेजाें से मुक्ति […]

गया : काफी संघर्ष के बाद देश काे अंग्रेजाें से मुक्ति मिली. देश काे आजादी दिलाने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अहम भूमिका काे देश कभी भुला नहीं सकता आैर सबसे बड़ी बात, ताे यह कि हथियाराें के बल पर नहीं बल्कि अवज्ञा, असहयाेग व अहिंसा काे अपना कर उन्हाेंने देश काे अंग्रेजाें से मुक्ति दिलायी.
आज आजाद भारत में कई अंग्रेज पैदा हाे गये हैं. इनमें भ्रष्टाचार, जाति व वर्गवाद, महिला हिंसा सहित कई ज्वलंत मुद्दे हैं, जिनसे छुटकारा दिलाने के लिए आज की तारीख में एक आैर गांधी की जरूरत है. अगर आज गांधी जी होते, तो देश में बह रही भ्रष्टाचार की बयार को भी अंग्रेजों की तरह करा सात समुंदर पार करा देते. ये विचार आम लाेगाें के हैं. मंगलवार काे महात्मा गांधी की जयंती है. ‘प्रभात खबर’ ने लाेगाें से ‘आज गांधी हाेते ताे…’ विषय पर राय ली, तो सबने स्वार्थ की राजनीति व देश को ठेस पहुंचाने वालों से सावधान किया.
राजनीति के कुत्सित विचाराें को कुचलना होगा
वह दाैर अलग था. तब की परिस्थिति व समस्या अलग थी. माहाैल भी अलग था. आजादी के इतने वर्षाें में काफी कुछ बदला है. आज के गांधी काे सबसे पहले राजनीतिकाें के कुत्सित विचाराें काे कुचलने के लिए खड़ा हाेना पड़ेगा. आजजातियाें व वर्गाें में बंटे राजनेता खुद ही करप्शन काे बढ़ावा देने में लगे हैं. इससे मुक्ति के लिए नये गांधी की जरूरत है.
अफजल हुसैन, सेवानिवृत्त कर्मचारी, वाणिज्यकर विभाग
आज फिर गांधीजी की है जरूरत
देश की अखंडता के लिए आज फिर से गांधी की है जरूरत. जाति, धर्म, संप्रदाय, वर्ग में हम इतने बंट गये हैं कि हर राेज इसकाे लेकर देश में अशांति है. इसकी जड़ में हमारे राजनेता हैं, जाे असंवैधानिक व भद्दे बयानबाजी कर हमें बांटने में लगे हैं. इन सभी काे एक धागे में बांधने के लिए गांधी जैसे प्रणेता की है जरूरत.

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