दाउदनगर : वैसे तो जिउतिया पर्व देश के विभिन्न प्रांतों में मनाया जाता है, लेकिन दाउदनगर में जिउतिया पर्व मनाने का तरीका अनूठा है और काफी मशहूर है. यहां यह नकल पर्व के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इसे देखने के लिए झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में लोग सपरिवार आते हैं.
जिउतिया पर्व के अवसर पर दाउदनगर शहर नौ दिनों तक हंसी-मजाक,व्यंग्य- विनोद ,गीत-संगीत,नृत्य, रहस्य-रोमांच प्रस्तुत करने में लिप्त रहता है. दाउदनगर शहर की खासियत यह है कि यहां इस पर्व का आरंभ अनंत पूजा के दूसरे दिन से ही प्रारंभ हो जाता है और नौ दिनों तक यह पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें अंतिम तीन दिन नकलों की भरमार रहती है .
माता-पुत्र का त्योहार जिउतिया: भाई बहन का पर्व रक्षा बंधन,करमा एवं भैया दूज, पति पत्नी का पर्व करवा चौथ या तीज है ,उसी तरह माता-पुत्र का पर्व जीउतिया है. यह आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है. इस पर्व में माता अपने पुत्र के चिरंजीवी होने की कामना करती है. यह पर्व तीन दिनों का होता है. नहाय खाय यानी सप्तमी को महिलाएं स्नान करके खाना खाती हैं.
स्नान करने के बाद माताएं पूजा अर्चना करने के बाद नोनी ( एक प्रकार का साग) को कच्चा निगलती हैं और मड़ुआ की रोटी,कंदा व झिंगी की सब्जी,व नोनी के साग खाने के बाद नहाय खाय करती हैं. शाम में पुआ व अन्य पकवान खाया जाता है.रात्रि 12 बजे के बाद अष्टमी शुरु होते ही निर्जला उपवास रख कर व्रती महिलाएं जीवीत पुत्रिका व्रत करती हैं और शाम में भगवान जीमुतवाहन की प्रतिमा के समक्ष पहुंच कर सोना,चांदी या धागे का बना जिउतिया रख कर पूजा अर्चना करते हुये अपने संतान के दीर्घायु होने की कामना करती हैं. व्रती महिलाओं द्वारा भगवान जीमूतवाहन की कथा सुनी जाती है.
