गया : दो पार्षदों के बीच आपसी विवाद में नगर निगम के इंजीनियर ने शहर के वार्ड नंबर एक की करीब नौ योजनाओं के बारे में सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद योजना स्थलों को विवादित व पहले से काम किया हुआ होने की रिपोर्ट दे दी. जांच में कनीय अभियंता की रिपोर्ट पूरी तौर से झूठी निकली. बाद में इन योजनाओं में काम शुरू कर दिया गया है.
वार्ड नंबर एक की पार्षद लाछो देवी ने इस मामले को उजागर करते हुए इस मामले में कनीय अभियंता द्वारा गलत रिपोर्ट दिये जाने की शिकायत नगर आयुक्त से की थी. नगर आयुक्त ने जांच कराते हुए पाया कि नौ जगहों पर रोड व नाली का काम पहले नहीं हुआ है व यहां काम कराने में किसी तरह का विवाद नहीं है.
बाद में नगर आयुक्त ने कनीय अभियंता अक्षय कुमार से स्पष्टीकरण मांगा. कनीय अभियंता ने स्पष्टीकरण में भूलवश रिपोर्ट दे दिये जाने की बात कही. इतना ही नहीं, इन योजनाओं के बारे में सरकार को रिपोर्ट भेज दिये जाने के कारण विभाग ने पैसा वापस करने का भी निर्देश जारी कर दिया था. आश्चर्य की बात यह है कि जिस अभियंता ने योजना स्थलाें काे विवादित व पहले से काम किया हुआ बताया था, उसी अभियंता ने अपनी रिपोर्ट के कुछ माह पहले ही योजना स्थल की जांच कर एस्टिमेट तैयार किया था.
यहां से शुरू हुआ था विवाद
पूर्व पार्षद की पहल पर नौ योजनाओं की स्वीकृति राज्य योजना मद से कराने की विभाग ने स्वीकृति दी थी. इसके बाद निकाय चुनाव की घोषणा हो गयी. सीट सुरक्षित होने के कारण पार्षद का चुनाव क्षेत्र बदल गया. उसके बाद योजना को विवादित व पूर्व से काम होने की रिपोर्ट उक्त पार्षद ने ही कनीय अभियंता पर दबाव बना कर करवायी थी.
इसमें दोनों वार्ड पार्षद पर्दे के पीछे से खेल कर रहे थे. सच्चाई यह है कि विभिन्न मुहल्लों में जिन नौ जगहों पर सड़क व नाली बनाने की योजना स्वीकृत हुई थी वहां के लोग रोड नाली नहीं होने के कारण बहुत फजीहत उठा रहे हैं. जांच के बाद निगम के इंजीनियर को फंसता देख निगम प्रशासन ने पहले की ही योजना में काम कराने की स्वीकृति दे दी. इनमें चार जगहों पर काम लगभग समाप्त होनेवाला है. अन्य जगहों के लिए टेंडर निकाला जा रहा है. नगर आयुक्त स्तर से गलत रिपोर्ट देनेवाले कनीय अभियंता पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी. यह भी निगम में चर्चा का विषय बना हुआ है.
