नगर निगम में हर कोई करता है ईमानदारी की बात, पर सबके काम में गड़बड़झाला

गया : नगर निगम क्षेत्र में चल रहे आवास योजना के लाभुक के चयन में की गयी गड़बड़ियां परत-दर-परत सामने आ रही हैं. पूर्व में लाभुक से पैसा वसूली, दूसरे की जमीन पर आवास योजना का लाभ देने से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं लेकिन इस बार गया नगर निगम ने दोस्ती निभाने […]

गया : नगर निगम क्षेत्र में चल रहे आवास योजना के लाभुक के चयन में की गयी गड़बड़ियां परत-दर-परत सामने आ रही हैं. पूर्व में लाभुक से पैसा वसूली, दूसरे की जमीन पर आवास योजना का लाभ देने से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं लेकिन इस बार गया नगर निगम ने दोस्ती निभाने के चक्कर में कायदे-कानून को ताक पर रख कर न केवल जहानाबाद के सिटी मैनेजर को आवास योजना के लाभुक के रूप में चयन किया बल्कि आवास बनाने के लिए उसे पहली किस्त भी दे दी.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना (हाउस फॉर ऑल) का लिस्ट में शहर के वार्ड नंबर 29 के शास्त्री नगर के रहनेवाले अवध किशोर का नाम भेजा गया. योजना की प्रथम किस्त देते वक्त सहायक, योजना प्रभारी से कई बार इस नाम को लेकर गरमा-गरम बहस भी हुई है.
सूत्रों ने बताया कि पहले के सिटी मैनेजर राजमणि गुप्ता के दबाव में सारा काम किया गया है. सभी को यह मालूम था कि अवध किशोर जहानाबाद नगर पर्षद में सिटी मैनेजर हैं. यही वजह थी कि उन्हें कुछ दिनों तक किस्त नहीं दी गयी थी. बाद में उस वक्त के प्रभारी रहे नगर आयुक्त जनार्दन अग्रवाल व सिटी मैनेजर राजमणि गुप्ता ने उदारता दिखाते हुए उन्हें पहली किस्त चार अप्रैल 2018 को दे दिया.
अन्य लाभुकों की होती है जांच-पड़ताल : आवास योजना का लाभ देने से पहले लाभुक से शपथ पत्र लेने के साथ ही तीन बार उसकी जमीन के दस्तावेजों की जांच की जाती है. इसके साथ ही स्थानीय वार्ड पार्षद से लाभुक के बारे में पता लगाया जाता है. इतनी प्रक्रिया पूरी किये जाने के बाद ही लाभुक को पहली किस्त भेजी जाती है. अब तक देखा गया है कि निगम क्षेत्र के कई लाभुकों का सूची में नाम आने के बाद कुछ कमियां दिखने पर लाभ नहीं दिया गया है.आवास योजना का लाभ लेनेवाले सिटी मैनेजर के मामले में किसी कर्मचारी की जांच से जुड़ी कोई भी रिपोर्ट निगम कार्यालय में मौजूद नहीं है.
कोई सही जानकारी देने को नहीं हुआ तैयार
जहानाबाद नगर पर्षद में सिटी मैनेजर पद पर काम कर रहे अवध किशोर को आवास योजना का लाभ दिये जाने की जानकारी लेने प्रभात खबर संवाददाता जब नगर निगम के विकास शाखा कार्यालय पहुंचा, तो वहां के कर्मचारी पहले टालमटोल करते रहे. बाद में कर्मचारी आपस में बहस करने लगे कि हमने पहले ही सिटी मैनेजर को प्रधानमंत्री आवास योजना का पैसा नहीं भेजने के लिए कहा था लेकिन, राजमणि सर (उस वक्त गया नगर निगम में सिटी मैनेजर) ने दबाव डाल कर पैसा दिलवाया दिया है.
पहले कई बार इस नाम को रोका गया था. कर्मचारियों ने अधिक पूछताछ करने पर बताया कि 2016-17 की सूची में अवध किशोर का नाम लाभुक के तौर पर आया है. पहली किस्त के तौर पर अवध किशोर के खाते में 50 हजार रुपये अप्रैल 2018 में आरटीजीएस किया गया है. उसके बाद से उन्हें दूसरी किस्त नहीं दी गयी है.
यह है नियम
नगर निगम में अपर नगर आयुक्त पद पर रहे सुशील कुमार ने बताया कि आवास योजना पर लाभ लेनेवाले लाभुकों की पगार 20 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस तरह की कोई गलती होती है तो उसे सीधे तौर अनियमितता व धांधली मानी जायेगी. उन्होंने कहा कि संविदा पर भर्ती सिटी मैनेजर की तनख्वाह लगभग 34 हजार रुपये हैं.
इसके बाद इन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता है. इधर एक पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि योजना के लाभ के लिए नियम के अनुसार 20 हजार के साथ-साथ 2011 की जनगणना में भी नाम होना जरूरी होता है. इस तरह की धांधली निगम में कोई नयी बात नहीं है. यहां हर कोई इमानदारी की दुहाई देता है पर काम उलटा ही होता रहा है.
क्या कहते हैं निगम के अधिकारी
नगर आयुक्त डॉ ईश्वर चंद्र शर्मा ने बताया कि सिटी मैनेजर को आवास योजना दिये जाने मामला उनके यहां आने से पहले का है. जानकारी मिली है, नियम को देख रहे हैं. उन्होंने बताया कि जांच के बाद ठोस कार्रवाई की जायेगी.

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