गया : गया कॉलेज गया के शिक्षा विभाग में हिंदी दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ धनंजय धीरज ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम मातृभाषा ही होनी चाहिए. हिंदी का एक गौरवमयी अतीत रहा है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में संपूर्ण देश को एकता के सूत्र में बांधने में हिंदी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है.
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी हिंदी को यथोचित स्थान मिलना चाहिए. इस कार्यक्रम को संचालित करते हुए कार्यक्रम समन्वयक शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ अभिषेक कुमार ने कहा कि हिंदी एकता का प्रतीक है. हिंदी हमें समाज व घर-परिवार से बांधे रखता है. हिंदी पढ़ना और पढ़ाना हमारा कर्तव्य है. उसे हम सबको अपनाने एवं व्यवहार में हमेशा रखने की आवश्यकता है.
इस अवसर पर शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर पवन कुमार ने कहा कि हमारी मातृभाषा हमारी संस्कृति की धरोहर है, जो हमारे पूर्वजों से मिली है. इसका हमें संरक्षण करना चाहिए और इसके लिए हमें अपनी मातृभाषा को सम्मान करने की आवश्यकता है. हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा विभाग गया कॉलेज गया के प्रशिक्षु शिक्षक भारती, काजल झा, नंदू गोंड, विक्रम अमरेंद्र, अमित, आशुतोष कुमार मिश्रा, चांदनी व अन्य ने अपने विचार रखे.
शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर पवन कुमार, डॉ अभिषेक कुमार, डॉ आरएन प्रियदर्शनी, अमरेंद्र कुमार, अजय शर्मा, विश्वजीत सिंह, मुहाफिज हुसैन व सदरे आलम आदि उपस्थित थे. इधर, गया कॉलेज के हिंदी विभाग में डॉ विनोद कुमार सिंह, डॉ भरत सिंह, डॉ कृष्णनंदन प्रसाद यादव, डॉ गीता सहाय, डॉ सोनू अन्नपूर्णा व डॉ अभय नारायण सिंह की मौजूदगी में हिंदी दिवस पर समारोह का आयोजन किया गया.
