गया एडीसीपीयू की सहायक िनदेशक िनलंिबत

गया : टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) द्वारा किये गये सोशल ऑडिट के खुलासे के बाद प्रदेश में कई अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में गया में जिला बाल संरक्षण इकाई व सामाजिक सुरक्षा कोषांग की सहायक निदेशक (एडीसीपीयू) नेहा नूपुर को निलंबित कर दिया गया है. आइसीडीएस के जिला […]

गया : टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) द्वारा किये गये सोशल ऑडिट के खुलासे के बाद प्रदेश में कई अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में गया में जिला बाल संरक्षण इकाई व सामाजिक सुरक्षा कोषांग की सहायक निदेशक (एडीसीपीयू) नेहा नूपुर को निलंबित कर दिया गया है. आइसीडीएस के जिला प्रोग्राम पदाधिकारी मोहम्मद कबीर को इन दोनों कार्यालयों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
इस संबंध में समाज कल्याण विभाग ने आदेश जारी कर दिया है. इससे पहले भोजपुर, मुंगेर, अररिया, मधुबनी व भागलपुर के एडीसीपीयू निलंबित किये जा चुके हैं.
बाल गृह में खामियाें को लेकर दी थी रिपोर्ट
गौरतलब है कि टिस ने गया बाल सुधार गृह, विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान, खुला आश्रय गृह, पर्यवेक्षण गृह में सोशल ऑडिट किया था. बाल सुधार गृह में टिस ने कई खामियों को पाया था. वहां रह रहे बच्चों ने बताया था कि कभी-कभी गृहमाता द्वारा उन्हें अपशब्द कहेेेे जाते हैं. बच्चों ने बताया था कि उन्हें यहां खेलने-कूदने में किसी प्रकार की रोक नहीं है, लेकिन जगह कम होने के कारण वह आउटडोर गेम खेलने से वंचित रहते हैं.
यह बात भी सामने आयी थी कि यहां लंबी अवधि से आवासित बालकों की संख्या ज्यादा होने के कारण बच्चे घुटन महसूस करते हैं. बच्चों को जो खाना दिया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता सही नहीं है. बच्चों के अंदर किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए समय-समय पर खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी बढ़ायी जाये. टिस की रिपोर्ट में बच्चों से काम कराने व उनकी उचित देखभाल नहीं करने का मामला भी रखा गया था. इसी प्रकार सभी अन्य बाल गृहों को लेकर टिस ने सोशल ऑडिट किया था.
रिपोर्ट के बाद अधीक्षक पर प्राथमिकी
टिस की रिपोर्ट के बाद जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग की सहायक निदेशक नेहा नूपुर द्वारा चार जून को बाल गृह का निरीक्षण किया गया था. इस निरीक्षण में कई कमियां सामने आयी थीं. मसलन, यहां की गृहमाता द्वारा बच्चों के साथ मारपीट, गाली देने व पिटाई करने की बात सामने आयी. बच्चों को मिलने वाला खाना भी गुणवत्ता के अनुसार नहीं पाया गया.
यहां बच्चों के खेलकूद और पढ़ाई की भी समुचित व्यवस्था नहीं है. बच्चों के लिए यहां लाइब्रेरी की सुविधा भी नहीं है. इन सब बातों को लेकर बाल सुधार गृह के अधीक्षक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी थी. इस मामले में जिला बाल संरक्षण इकाई ने जिला स्तरीय निरीक्षण समिति को अभी तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंप दी थी.

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