गया : शहर में सरकार ने लोगों को सपना दिखाया था कि अब एक भी घर कच्चा नहीं रहेगा. साथ ही खानाबदोश लोगों को भी सरकारी जमीन पर आवास बनाकर दिये जायेंगे. गया नगर निगम क्षेत्र में तीन वर्ष पहले इस योजना की शुरुआत की गयी. वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 781 लाभुकों का चयन किया गया.
इसमें महज 336 लोगों को ही तीसरे किस्त का पैसा दिया गया है. हालात यह है कि 1300 से अधिक परिवारों को निगम की करनी से बिना छत के गुजारा करना पड़ रहा है. बारिश के दिनों में किसी दूसरे के घर की शरण लेना इनकी मजबूरी बन गयी है. आवास योजना का संचालन करने के लिए निगम से अब तक जिन्हें जिम्मेदारी दी गयी, उन सभी ने अपने अनुसार कई तरह के नियम बनाकर काम करना शुरू किया.
हालात यह रही कि योजना का लाभ के रूप में किसी को प्रथम तो किसी को दूसरी किस्त ही अब तक मिल सकी है. दो वर्ष से अधिक समय से आवास योजना की पूरी किस्त प्राप्त करने के लिए लाभुक निगम के दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं. कई जगहों से नगर निगम कर्मचारी द्वारा योजना के लाभुक से नाजायज वसूली का भी आरोप लगा. आरोप के बाद अधिकारी ने जांच कराने की बजाय मैनेज करने पर ही ज्यादा जोर दिया है.
कई बार बदले गये आवास योजना प्रभारी : नगर निगम में प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू से विवादों के घेरे में रही है. निगम से जिन्हें इस योजना का प्रभारी बनाया गया उनके ऊपर कई तरह के आरोप लगे. पार्षदों द्वारा कई बार नापसंदगी सामने आने पर आवास योजना के प्रभारी को चेंज कर दिया गया है.
इसके बाद भी यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले दिनों ही आवास योजना के फॉर्म जमा करने में 500-500 रुपये लेने की बात सामने आयी थी. इसके बाद कई पार्षद प्रतिनिधियों ने हंगामा किया था. इससे पहले वार्ड नंबर 42 में लाभुक को किस्त देने पर 20 हजार रुपये मांगने की शिकायत अधिकारियों से की गयी.
रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी पर अधिकारी ने जांच तक नहीं करायी उल्टे लाभुक का ही अब तक दूसरा किस्त रोक दिया गया है. लाभुक की स्थिति यह है कि बरसात को देखते हुए उठायी गयी दीवार पर खपड़ा का छप्पर डालना पड़ा. प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभुक को तीन किस्तों में दो-दो लाख रुपये दिये जाते हैं. इसके लिए लाभुक की अपनी रैयती जमीन होनी जरूरी है.
पिछली योजनाओं में भी लगे कई तरह के आरोप
निगम सूत्रों का कहना है कि इससे पहले राजीव आवास योजना व मलिन बस्ती समेकित विकास योजना में भी लोगों को लाभ देते वक्त किसी तरह के नियम का पालन नहीं किया गया है. इतना ही नहीं जरूरतमंद लोगों को अब तक लाभ नहीं मिल सका. लेकिन, पैरवी और पैसे के बल पर कई पक्के मकानों के मालिक भी इस योजना का लाभ पा गये.
हालांकि मलिन बस्ती समेकित विकास योजना यहां अब समाप्त हो गयी है. राजीव आवास योजना में लगभग 50 लाभुकों को लाभ दिया जाना है. राजीव आवास योजना में यहां के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की खूब चलती रही है. सूत्रों का कहना है कि पैरवी व पैसा के बल पर ही बिना डीपीआर में चयनित वार्ड में भी योजना का समायोजन किया गया है.
