गया : जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या का आयोजन सभापति सुरेन्द्र सिंह सुरेन्द्र की अध्यक्षता में किया गया, जिसका संचालन विषधर शंकर ने किया. इस अवसर पर महामंत्री सुमंत ने सभी को रथयात्रा की बधाई दी. उपस्थित कवियों ने वर्षा ऋतु में वर्षा के न होने पर दुख व्यक्त करते हुए, अपनी कविताएं पढ़ीं. अजीत कुमार ने कहा, हावा के सन सन से बदरा के घन घन से नाचे मन मयूरा, करिआ–करिआ बदरी बरस एही निहोरा.
जयराम सत्यार्थी ने तो यहां तक कहा, लगता है बदरा भी बेवफा हो गया है, जानें क्यों पानी की बूंदों को बंधक बना कर खफा हो गया है. मुद्रिका सिंह ने कहा, किसान ताकइत हथ आसमान आंख फार के, बदरा मुदइया रख देलई सबके जान मार के. घनश्याम अवस्थी ने आग्रह किया,बादल गरजो तप्त धरा के तपित ह्दय को जल भर कर तुम शीतल भर दो. राम परिखा सिंह ने कहा, आसमान से आग बरसाना बंद करो प्रभु, बरसा की बूंदें बरसाओ. विजय कुमार शर्मा ने कहा, करिआ लगल हई बदरिया कहिंआ बरसतई न.
डॉ सुधांशु ने कहा आयी है, बरसात सुहानी. सभापति सुरेन्द्र सिंह सुरेन्द्र ने कहा, आयी न बरसात सुहानी, लोग मांग रहे पानी–पानी. डॉ राकेश कुमार सिन्हा रवि ने वर्षा के बहाने सरकार को लपेटा, जइसे मौसम के बेरुखी, ओइसने बेरुख होलो सरकार.डॉ निरंजन श्रीवास्तव ने कहा, बलभद्र, सुभद्रा, जगन्नाथ रथ पर दिखते साथ, भक्त झुकाते उनके आगे भक्ति भाव से माथ. डॉ सुलतान अहमद ने कहा, अमानत में तुम सब खयानत न करना, मुहब्बत में अब भी दयानत छुपी है.
नंद किशोर सिंह ने कहा, मेहनत से इंसान बना है, श्रम शक्ति से महान बना है. चंद्रदेव प्रसाद केशरी ने कश्मीरी नेताओं से कहा, पाक परस्त कश्मीरी नेताओं ने बेच दी अपनी जमीर, इनकी ओछी हरकतों से नहीं बदला यह कश्मीर. इनके अलावा शिव प्रसाद सिंह मुखिया, विजय कुमार सिन्हा, सुरेंद्र पांडेय सौरभ, संजू प्रसाद आदि ने भी अपनी कविताएं पढ़ीं. इस मौके पर अतिथि के रूप में देवन मिसिर मगही फिल्म के निर्माता–निर्देशक मिथिलेश सिंह व मगध पुस्तक मेला के संयोजक कुंदन उपस्थित रहे.
