कुदाल से छह साल में खोद डाला 30 फुट का कुआं

सारठ के आराजोरी गांव के 60 साल के बुजुर्ग किसान किशन वर्मा को एक सिंचाई कूप की जरूरत थी. उन्होंने इसके लिए ग्रामसभा से दो बार प्रस्ताव पास करा कर भेजा, लेकिन उन्हें सिंचाई कूप नहीं मिला. बुजुर्ग की हिम्मत तो देखिये, उन्होंने सरकारी मदद के लिए ऑफिस-ऑफिस का चक्कर लगाना छोड़ कर वर्ष 2011 […]

सारठ के आराजोरी गांव के 60 साल के बुजुर्ग किसान किशन वर्मा को एक सिंचाई कूप की जरूरत थी. उन्होंने इसके लिए ग्रामसभा से दो बार प्रस्ताव पास करा कर भेजा, लेकिन उन्हें सिंचाई कूप नहीं मिला. बुजुर्ग की हिम्मत तो देखिये, उन्होंने सरकारी मदद के लिए ऑफिस-ऑफिस का चक्कर लगाना छोड़ कर वर्ष 2011 में खुद ही कुदाल उठा लिया और खुदाई शुरू कर दी.
किशन की मेहनत रंग लायी. कुआं धीरे-धीरे गहरा होता गया और उससे सिंचाई भी होने लगी थी. 2017 में उनकी मौत हो गयी, लेकिन उसके पहले तक वे 30 फुट कुआं खोद चुके थे. इस कुएं से उनके बेटे नाजिर वर्मा दो एकड़ खेत की सिंचाई करते हैं. उन्हें अपने पिता पर फक्र है. बताते हैं कि पिता जी हर रोज दो-तीन घंटे कुआं खोदते थे और बाकी समय में खेती करते थे. वे खुद पिता की मदद करते थे. बाद में उनका शरीर जवाब देने लगा. मार्च 2017 में किडनी की गंभीर बीमारी की वजह से उनकी मौत हो गयी.
कच्चे कुएं की नहीं हो सकी जोड़ाई : नाजिर वर्मा कहते हैं कि पिता के खोदे सिंचाई कूप से वे आज भी अपनी दो एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं, लेकिन यह कुआं कच्चा है. अगर इसकी पक्की जोड़ाई नहीं की गयी तो धंस जायेगा. उनके पास इसकी जोड़ाई के लिए पैसे नहीं हैं.
वे चाहते हैं कि सरकार कुएं की जोड़ाई के लिए उनकी आर्थिक सहायता करे. इसके लिए उन्होंने ग्रामसभा से प्रस्ताव पारित करवा कर आगे बढ़ाया है. वे भी पिता की तरह ऑफिस-ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं, उन्हें भी अब तक सफलता नहीं मिली है.
कहती हैं मुखिया
मुखिया ललिता देवी ने कहा कि नाजिर वर्मा के सिंचाई कूप की जोड़ाई का प्रस्ताव उन्होंने आगे बढ़ाया है. पंचायत में कई अन्य सिंचाई कूप के प्रस्ताव स्वीकृति के लिये मुख्यालय भेजे गये हैं. उनके कार्यकाल में अभी तक सिंचाई कूप की स्वीकृति नहीं मिली है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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