यूनियन के नेताओं ने कहा, पहले से काम कर रहे कर्मचारी को वेतन नहीं, नये को रखने की हो रही तैयारी!
गया : कर्मचारियों व नगर निगम प्रशासन के बीच हड़ताल समाप्त करने के लिए शुक्रवार को आयोजित वार्ता विफल हो गयी. कर्मचारी नेता मांग पूरी होने के बाद ही हड़ताल समाप्त करने की बात पर अड़े रहे. बताया जाता है कि बकाया वेतन, अस्थायी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने, स्थायी कर्मचारियों को सातवां वेतन का लाभ देने, हाइकोर्ट के आदेश पर 22 निकाले गये कर्मचारियों को दोबारा बहाल कराने व जल पर्षद के कर्मचारियों को वेतन भुगतान आदि मांगों को लेकर नगर निगम कर्मचारी शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं. हर बार की तरह शुक्रवार को भी हड़ताल शुरू होते ही मेयर, डिप्टी मेयर व नगर आयुक्त कर्मचारी यूनियन के नेताओं से वार्ता करने पहुंचे. कर्मचारियों ने अस्थायी सफाई कर्मचारी का मानदेय 750 रुपये व ड्राइवर का मानदेय 850 रुपये करने की मांग रखी.
इसके साथ ही चार माह के बकाया वेतन का भी भुगतान करने की मांग की. वार्ता में डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने निगम प्रशासन की ओर से अपनी बात रखते हुए कहा कि निगम को इस बार पंचम वित्त का पैसा उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर नहीं दिये जाने के कारण नहीं मिल सका है. अगले माह ही पंचम वित्त का पैसा मिल सकेगा. उसके बाद ही वेतन दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अस्थायी सफाई कर्मचारियों व ड्राइवरों का मानदेय बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है. प्रदेश के अन्य निकाय क्षेत्र से यहां अधिक मानदेय दिया जा रहा है.
क्या कहना है कर्मचारी नेताओं का : कर्मचारी नेता अमृत प्रसाद ने कहा कि निगम में चार माह से स्थायी कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है. सामान की खरीदारी पर पैसे खर्च किये जा रहे हैं. लेकिन अस्थायी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के नाम पर निगम प्रशासन मौन साध लेता है. इस बार निगम प्रशासन जब तक हमारी मांगों को पूरी तौर से मानने को तैयार नहीं होता है, तब तक कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सुविधाएं देने के नाम यहां निगम प्रशासन दोहरी नीति अपनाता है.
कहीं भी कर्मचारियों के हित में अधिकारी व जनप्रतिनिधि नहीं सोचते हैं. यहां सफाई प्रभारी ही ड्राइवरों की बहाली में लाइसेंस चेक करते हैं, इसके साथ ही इनके पास रेवेन्यू, स्थापना व योजनाओं की भी जिम्मेदारी है. यह कैसा कार्यालय है पता ही नहीं चलता. मौके पर हरिनंदन शर्मा, अशोक राम, बालकेश्वर भगत आदि ने भी अपने विचार रखे.
यूनियन नेताओं ने जारी की बहाली की लिस्ट
नहीं हुई शहर में सफाई निगम कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद शुक्रवार को कूड़ा का उठाव नहीं हुआ. लोगों का कहना है कि निगम में कुछ भी दिक्कत होने पर शहर के लोगों को मिलने वाली सुविधाएं बंद कर दी जाती हैं. कर्मचारियों को मांग मनवाने के लिए आम लोगों को दी जाने वाली सुविधाएं चालू रखकर अधिकारियों से लड़ाई लड़नी चाहिए. लोगों ने बताया कि हड़ताल अगर एक सप्ताह खिंच जाती है, तो शहर में हर जगह कचरे का अंबार लग जायेगा. इससे तो अच्छा है कि शहर की सफाई नगर निगम किसी प्राइवेट कंपनी को सौंप दे. सारी झंझट ही दूर हो जायेगी.
