बोधगया : मगध विश्वविद्यालय कैंपस में 2002 से जारी इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट मैनेजमेंट (आइआरडीएम) ने अबतक सैकड़ों युवक-युवतियों को आत्मनिर्भर बना चुका है. संस्थान से मास्टर डिग्री प्रोग्राम इन रूरल डेवलपमेंट मैनेजमेंट (एमआरडीएम) का कोर्स कर आठ सौ से ज्यादा स्टूडेंट्स विभिन्न क्षेत्रों में जॉब कर रहे हैं.
संस्थान के डायरेक्टर डॉ पीके चौधरी ने बताया कि ग्रामीण विकास प्रबंधन संस्थान (आइआरडीएम) से एमआरडीएम का कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स का प्लेसमेंट आसानी से विभिन्न सोशल सेक्टरों में हो जाता है.
रोजगार के अवसर : एमआरडीएम कोर्स करने के बाद ज्यादातर स्टूडेंट्स जॉब की तलाश में जुट जाते हैं. इसके लिए संस्थान द्वारा रोजगार देनेवाली कंपनियों व एनजीओ को आमंत्रित किया जाता है व छात्रों का कैंपस सलेक्शन किया जाता है. संस्थान के फुल टाइम फैकल्टी डॉ राम कुमार सिंह ने बताया कि एमआरडीएम का कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को ग्रामीण विकास के क्षेत्र से जुड़े एनजीओ, सोशल सेक्टर, कॉरपोरेट सेक्टर, रीजनल रूरल बैंकों में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं. इस कोर्स को करनेवाले स्टूडेंट्स का नेशनल व इंटरनेशनल मार्केट में भरपूर डिमांड है. उन्होंने बताया कि नामांकन के लिए 30 मई से आवेदन की बिक्री शुरू कर दी गयी है.
नामांकन प्रक्रिया
आइआरडीएम के एमआरडीएम कोर्स में नामांकन के लिए आवेदक को स्नातक पास होना चाहिए या फिर स्नातक की परीक्षा में शामिल होनेवाले होने चाहिए. इसके लिए संस्थान द्वारा जारी प्रॉस्पेक्टस के साथ आवेदन की खरीद कर उस पर उल्लेखित दिशा-निर्देश के अनुसार जमा करने होंगे. इसके बाद आवेदकों की लिखित परीक्षा ली जायेगी व उत्तीर्ण परीक्षार्थियों की काउंसेलिंग के बाद सीट के हिसाब से उनका चयन किया जायेगा. इसमें सरकार द्वारा लागू आरक्षण रोस्टर का भी अनुपालन किया जायेगा. संस्थान में एक बैच के लिए 60 सीट निर्धारित है. दो वर्षीय कोर्स को चार सेमेस्टर में बांटा गया है.
