बोधगया : मगध विश्वविद्यालय के संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ शनिवार को एमयू में कुलपति प्रो कमर अहसन ने बैठक की. इस दौरान कुलपति ने आह्वान करते हुए कहा कि संबद्ध महाविद्यालय समाज में वंचित वर्ग की शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में एक सशक्त भूमिका का निर्वाह करते हैं. इस कारण उनकी जिम्मेदार व संवेदनशील भूमिका अपेक्षित है.
उन्हें सरकार व विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित नियमों के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए. साथ ही, उक्त परिधि में छात्र हित को ध्यान (दृष्टि-पथ) में रखते हुए विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व के निर्माण हेतु सतत प्रयत्नशील होना चाहिए. कुलपति ने इस बात को भी रेखांकित किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में वैसे छात्रों की परीक्षा आयोजित नहीं की जायेगी, जिनका प्रवेश नियमानुसार संबद्धता प्राप्त महाविद्यालयों में नहीं हुआ है.
एमयू के शिक्षा विभाग स्थित डॉ राधाकृष्णन सभागार में आयोजित बैठक में वीसी ने कहा कि संबद्ध महाविद्यालयों को सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में आगे आ कर राष्ट्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करना चाहिए. वीसी ने प्राचार्यों से आह्वान करते हुए कहा कि ग्रामीण परिवेश में छिपी प्रतिभाओं को तराशने के लिए प्रेरित करने की चुनौती को स्वीकार किये जाने की जरूरत है, ताकि राष्ट्र की अपेक्षाओं को पूरा किया जा सके. वीसी ने कहा कि चूंकि राज्य सरकार सभी संबद्ध महाविद्यालयों को उनके परिणामों के आधार पर अनुदान की राशि विमुक्त करती है अत: उनका भी यह दायित्व है कि वे सरकार के नियमों के साथ समन्वय बनाते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को सुनिश्चित करें. वीसी ने किताबी ज्ञान के अतिरिक्त शिक्षकेतर गतिविधियों : विशेषकर खेलकूद व एनएसएस को सशक्त किये जाने पर बल दिया व आशा व्यक्त की कि ये सभी संबद्ध महाविद्यालय सामाजिक नव-निर्माण में भागीदार बन सकेंगे.
31 मई तक समर्पित करने हैं आंकड़े
रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) व शैक्षणिक सर्वे के लिए आंकड़ों को समय पर जमा करने के लिए सभी को प्रेरित व निर्देशित किया गया कि किसी तरह की समस्या होने पर राज्य सरकार के नोडल पदाधिकारी या एमयू के नोडल पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है. इस पर एमयू के नोडल पदाधिकारी ने बताया कि हर हाल में 31 मई 2018 तक आंकड़ों को जमा किया जाना है, अन्यथा सरकार के पोर्टल से महाविद्यालयों का नाम हट जायेगा. गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, नवादा व अरवल जिले में अवस्थित मगध विश्वविद्यालय क्षेत्रान्तर्गत वैसे 27 संबद्धता प्राप्त कॉलेज, जिन्हें बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 की धारा 21(2)(d) के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो चुकी है, के प्राचार्यों की बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो कमर अहसन ने की. संचालन नोडल पदाधिकारी डॉ शैलेंद्र कुमार ने किया व धन्यवाद ज्ञापन बॉटनी के पूर्व विभागाध्यक्ष सह वोकेशनल कोर्सों के नोडल पदाधिकारी प्रो एनके शास्त्री ने किया. बैठक में कुलसचिव डॉ शैलेश कुमार सिंह, डीएसडब्ल्यू डॉ सत्यरतन प्रसाद सिंह, खेलकूद निदेशक डॉ ब्रजेश राय, कॉलेज निरीक्षक (विज्ञान) आदि अधिकारियों ने भी भाग लिया.
काॅलेजों से मांगी गयी जानकारी
प्राचार्यों की बैठक में सभी कॉलेजों के संबंधन की अद्यतन स्थिति, संबंधन के विषयों के विवरण, छात्रों की सूची, शिक्षकों की सूची, शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारियों के भुगतान की स्थिति, वाई-फाई की स्थिति, बायोमीटरीक उपस्थिति की सुनिश्चित अवस्थिति, पुरुष व महिला शौचालयों के अतिरिक्त स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, स्वच्छ भारत अभियान की प्रगति रिपोर्ट आख्या, पौधारोपण की तैयारी आदि विषयों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी व विश्वविद्यालय प्रशासन को आश्वस्त किया गया कि विकासमूलक कार्यक्रमों में वे बढ़-चढ़ कर भाग लेंगे. इस बीच विश्वविद्यालय डिजीटाइजेशन परियोजना के संबंधित एक पावर प्वाइंट की प्रस्तुति देकर उसके महत्वपूर्ण आयामों से सभी को परिचित कराया गया. उन्हें बताया गया कि छात्रों के निबंधन की प्रक्रिया को प्रामाणिक व स्टूडेंट फ्रेंडली बनाया जा रहा है. इस नयी व्यवस्था के अंतर्गत निबंधन की प्रक्रिया ऑनलाइन की जायेगी, जिसमें छात्रों को अपने घर पर ही निबंधन संख्या से संबंधित दस्तावेज को डाउनलोड कर पाने की सुविधा होगी. यह नयी व्यवस्था नये एकेडमिक सत्र से प्रारंभ कर दी जायेगी.
