पुलिसकर्मियों के जमावड़े व नेताओं की आवाजाही से कई दिनों तक अस्त व्यस्त रहा था बोधगया
बोधगया : विश्व में शांति व अहिंसा का पैगाम प्रसारित करनेवाली बुद्ध की ज्ञान स्थली महाबोधि मंदिर परिसर में सात जुलाई 2013 की अहले सुबह हुए सीरियल बम धमाकों से बोधगया की गलियों में जहां सन्नाटा पसर गया था वहीं देश-विदेश में भी सनसनी फैल गयी थी. महाबोधि मंदिर परिसर सहित बोधगया के अन्य स्थानों पर हुए बम धमाके तो हालांकि हल्के थे, पर धमाकों ने गहरे जख्म दे दिये थे. धमाकों की गूंज से बोधगया अंदर से हिल उठा था. धमाकों ने मंदिर में साधना कर रखे दो बौद्ध श्रद्धालुओं को मामूली रूप से ही घायल किया था लेकिन उसकी टीस अब भी बरकरार है. शांति व अहिंसा का संदेश प्रसारित करने वाला यह स्थल अब संगीनों के साये में समय व्यतीत करने को विवश है. वर्तमान में महाबोधि मंदिर की सुरक्षा में बीएमपी के 300 जवानों को मुस्तैद रखा गया है. सुरक्षा के अन्य उपकरण अलग से.
लोगों को सहसा नहीं हुआ था यकीन :सात जुलाई की अहले सुबह करीब साढ़े चार बजे महाबोधि मंदिर परिसर में बोधिवृक्ष के पास व अन्य तीन जगहों पर हुए बम धमाकों की खबर बोधगया में आग की तरह फैल गयी थी. जिसे देखो मंदिर की तरफ भाग रहा था. लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि मंदिर में बम धमाका क्यों व कैसे हुआ होगा. लेकिन, थोड़ी ही देर में पता चल गया कि मंदिर के अलावा 80 फुट बुद्ध मूर्ति, तेरगर मोनास्टरी व सुजाता बाइपास में खड़ी एक बस में भी धमाका हुआ है.
वैसे, कोई जान नहीं गयी थी, इसका संतोष सबको था. धमाकों के कुछ ही देर बाद तत्कालीन डीएम बाला मुरुगन डी व एसएसपी गणेश कुमार सहित जिला प्रशासन के तमाम अधिकारी बोधगया पहुंचने लगे थे. महाबोधि मंदिर का मेन गेट बंद कर दिया गया था व धमाके से घायल दो बौद्ध श्रद्धालुओं को मगध मेडिकल कॉलेज पहुंचा दिया गया था. स्थानीय लोगों की भीड़ मंदिर के आसपास जमा थी. मंदिर परिसर में हर तरफ खोजी कुत्तों व मेटल डिटेक्टर्स के माध्यम से जांच-पड़ताल शुरू कर दी गयी थी. इस दौरान हर चेहरे पर एक अनजान भय व आतंक की छाया स्पष्ट दिख रही थी.
चिंतित सीएम भी भागे-भागे पहुंचे थे बोधगया :बम धमाकों की सूचना पर सीएम नीतीश कुमार सहित आला अधिकारियों की टीम दोपहर करीब 12 बजे तक महाबोधि मंदिर पहुंच चुकी थी. बम विस्फोट वाले स्थलों को देखने के बाद सीएम ने मंदिर परिसर में सुरक्षाबलों को तत्काल प्रभाव से तैनात कर देने का निर्देश दिया व अधिकारियों के साथ बैठक कर वापस पटना लौट गये. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस नेत्री अंबिका सोनी, मायावती, राजीव प्रताप रूढ़ी, सूबे के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, सहित अन्य कई नेताओं का आना-जाना लगा रहा. इस बीच एनआइए की टीम भी जांच-पड़ताल शुरू कर चुकी थी. मंदिर की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी तब सीआइएसएफ को सौंपे जाने की मांग की गयी थी.
महाबोधि मंदिर की बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था
सात जुलाई 2013 के बाद से महाबोधि मंदिर परिसर के साथ ही बोधगया की सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गयी. इसके तहत मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ा दी गयी. डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर के साथ ही लगेज स्कैनर लगा दिये गये. पिछले 19 जनवरी के बाद से मंदिर परिसर में प्रवेश करने के पहले ही बाहरी परिसर में भी लोगों को मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ रहा है. मंदिर के अंदर व बाहरी क्षेत्र में 24 घंटे बीएमपी के जवानों की तैनाती कर दी गयी है व मंदिर परिसर के अंदर सात वाच टावरों के माध्यम से निगरानी की जा रही है. सुरक्षा के लिहाज से ही बम धमाकों के बाद महाबोधि मंदिर व जगन्नाथ मंदिर के बीच रहे करीब 57 दुकानों को तोड़ दिया गया था व उक्त क्षेत्र को ऊंची दीवार से घेराबंदी करा दी गयी थी.
जनवरी में भी बोधगया को दहलाने की हुई कोशिश
आतंकी निशाने पर आ चुके महाबोधि मंदिर व बोधगया को आतंकियों ने एक बार फिर से 19 जनवरी को दहलाने की कोशिश की. हालांकि, समय रहते बमों का पता चल गया और बड़ा हादसा टल गया. 19 जनवरी को तब बोधगया में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा प्रवास पर थे व सूबे के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी बम मिलने के कुछ ही घंटे पहले महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना कर वापस पटना लौटे थे. बोधगया में पुलिसकर्मियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी भी थी.
रांची से बस से बोधगया पहुंचे थे आतंकी
बम धमाकों की जांच में जुटी एनआइए की टीम में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, महाबोधि मंदिर में बम विस्फोट करनेवाले आतंकियों की टोली छह जुलाई 2013 की रात में रांची से बस द्वारा बोधगया पहुंची थी. सभी आतंकी सात जुलाई की सुबह तीन बजे गया-डोभी रोड स्थित दोमुहान पर बस से उतरे थे व वहां से ऑटो के सहारे बोधगया पहुंचे थे. इसके बाद रांची का रहनेवाला हैदर अली नामक युवक ने ही महाबोधि मंदिर के दक्षिणी हिस्से से दीवार फांद कर मंदिर परिसर में प्रवेश किया था. उसके अन्य साथियों ने उसे विस्फोटक से भरे छोटा गैस सिलिंडर को मंदिर परिसर तक पहुंचाने में सहयोग किया था.
हैदर अली मंदिर के साधना उद्यान में प्रवेश करने के बाद बौद्ध भिक्षु का चीवर धारण कर लिया था. इसके बाद एक-एक कर वह महाबोधि मंदिर के अलग-अलग हिस्सों में चार स्थानों पर बमों को प्लांट कर दिया था. जांच में यह भी खुलासा हुआ था कि हैदर अली रांची में एक सैलून में हजाम को यह कह कर बाल को छोटा कराया था कि उसके बाल को गौतम बुद्ध की तरह छोटी कर दी जाये. बाद में एनआइए की टीम ने उक्त नाई से हैदर की पहचान भी करा ली थी. साथ ही, हैदर द्वारा बमों को प्लांट किये जाने के बाद वापसी के दौरान साधना उद्यान में फेंके गये चीवर की टच डीएनए जांच करायी गयी थी. काफी जांच-पड़ताल के बाद हैदर को फरवरी 2014 में पलामू से दबोचा गया था. वह अपना नाम बदल कर वहां नाम बदल कर रहा था. उसके बाद उसके अन्य साथियों को भी एक-एक कर दबोचा गया था.
