गया : एक पुरानी कहावत है शिक्षा हर इंसान को बदल देती है. एेसा ही बदलाव पिछले कई सालों से शहर के जेल रोड स्थित सीआरपीएफ कैंप के कैंपस में बने बाल सुधार गृह में चल रहा है. यहां विभिन्न अपराधों में लाये गये बाल कैदियों को न सिर्फ अच्छी शिक्षा दी जा रही है, बल्कि उनके अंदर एक जिम्मेदार नागरिक होने का बोध भी भरा जा रहा है. इन बाल कैदियों को ‘क, ख, ग’ के साथ ही नैतिक शिक्षा भी दी जा रही है.
सप्ताह में छह दिन चलता है क्लास: समाज कल्याण विभाग के निर्देश पर यहां क्लास लगती है. बाल सुधार गृह में सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक क्लास चलता है. शिक्षिका ज्योत्सना, खुशबू सिन्हा, कविता सिंह और मिनी कुमारी द्वारा बाल कैदियों के जीवन को शिक्षा के जरिये बदलने में लगी है. यहां वर्ग एक से पांच और छह से आठ का क्लास लगता है. हर वर्ग में 20 से 25 की संख्या में बाल कैदी शामिल होते हैं. सप्ताह में छह दिन यह क्लास चलता है. शनिवार को यहां सांस्कृतिक गतिविधियों, पेंटिंग व संगीत का आयोजन होता है. ताकि बाल कैदी के अंदर रचनात्मकता का भी विकास हो.
पढ़ाना नहीं होता आसान
बाल कैदियों को पढ़ाना आसान नहीं होता. पहले से ही अपराध बोध से ग्रसित बाल कैदी बाल सुधार गृह में मिलनेवाले माहौल से तालमेल करने में थोड़ा हिचकिचाते हैं. लेकिन, जैसे-जैसे यह इन शिक्षकों व यहां के दूसरे कर्मचारियों के संपर्क में आते हैं, तो यह काफी मिलनसार हो जाते. बातचीत के क्रम में कई बाल कैदियों ने बताया कि उन्हें अगर घर पर ऐसा माहौल मिलता, तो उनसे अपराध शायद नहीं होता. शायद यही कारण है कि यहां रह रहे ज्यादातर बाल कैदी दुबारा यहां नहीं आना चाहते हैं. वह अक्सर इसका जिक्र क्लास रूम में करते हैं.
2000 में सिर्फ 12 ही यहां दोबारा आये
बाल सुधार गृह के अधीक्षक बताते हैं कि पिछले कई सालों से यहां बाल कैदियों को दी जा रही शिक्षा का असर देखने को मिल रहा है. चार सालों में यहां विभिन्न अपराधों में पहुंचें दो हजार बाल कैदियों में महज 12 ही कैदी दोबारा किसी अपराध में यहां आये हैं. वह कहते हैं कि जुवेनाइल एक्ट के तहत जो काम हमें सौंपा गया है उसी के अनुरूप इन बाल कैदियों को सुधारने का प्रयास चल रहा है. वह कहते हैं कि यहां पहुंचे ज्यादातर बाल कैदियों के तौर तरीके काफी बदल गये हैं.
एक नजर बदलावों पर
वह समय पर क्लास रूम में पहुंचते हैं
उन्हें पता है कि क्या अच्छा है क्या बुरा
महिला शिक्षिकाओं के प्रति आदर का भाव
प्रतिदिन बागबानी करना व फूलों को पानी देना
सभी जनरल प्रतियोगिता की तैयारी को इच्छुक
बाल सुधार गृह में फिलहाल 113 बाल कैदी रह रहे हैं. शिक्षा का ही असर है कि वे अपने कैरियर को लेकर सोच रहे हैं. ज्यादातर बाल कैदी जनरल प्रतियोगिता की तैयारी करने को इच्छुक हैं. इसलिए उनके लिए मंगवाई जाती किताबें व अखबारों को बहुत ही गंभीरता से पढ़ते हैं, ताकि यहां से निकलने के बाद वह किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर सकें.
