गया : नगर आयुक्त के बोर्ड पर नाम लिखे जाने की चर्चा कर्मचारियों के बीच शनिवार को दिन भर होती रही. शनिवार को नगर आयुक्त के सूची बोर्ड पर सुशील कुमार का नाम लिखे जाने पर कर्मचारी चर्चा करते रहे कि दैनिक कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी किसी-न-किसी कर्मचारी को चार्ज देकर जाते हैं. उनके नाम अब तक नगर आयुक्त की सूची वाले बोर्ड पर नहीं लिखा गया है.
जानकारों का कहना है कि नगर आयुक्त की अनुपस्थिति में कनीय को ही दैनिक कार्यों के लिए प्रभार दिया जाता है. नगर आयुक्त के आते ही उनका प्रभार स्वत: समाप्त हो जाता है. एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दैनिक कार्यों का प्रभार मिलने के बाद सहायक नगर आयुक्त ने फुल चार्ज के लिए खुद ही प्रधान सचिव को पत्र भेजा है. आठ मई को अपर नगर आयुक्त ने प्रधान सचिव को पत्र भेजा. उसी दिन सरकार द्वारा ईश्वर चंद्र शर्मा को नगर आयुक्त के पद पर पदस्थापित करने का पत्र निर्गत किया गया है. सूत्रों का कहना है कि सात मई को नगर आयुक्त के प्रभार में रहे जनार्दन अग्रवाल ने दैनिक कार्यों के निष्पादन के लिए अपर नगर आयुक्त सुशील कुमार को प्रभार सौंपा था. कर्मचारियों के बीच चर्चा हो रही है कि कई-कई दिनों तक नगर आयुक्त के नहीं रहने पर सिटी मैनेजर दैनिक कार्य के लिए प्रभार में रहे हैं. इतना ही नहीं एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नये नगर आयुक्त को सोमवार को ज्वाइन करना है और शुक्रवार को ही सहायक नगर आयुक्त ने योजनाअों का वर्क ऑर्डर तक जारी कर दिया है.
वास्तु का भी ख्याल, बदली कुर्सी की दिशा भी
नगर आयुक्त चेंबर में जनार्दन प्रसाद अग्रवाल के प्रभार लेते ही सबसे पहले कुर्सी की दिशा बदल दी गयी थी. पता चला है कि वास्तु का ख्याल रखते हुए यह फेरबदल किया गया है. स्थायी तौर पर नगर निगम को नगर आयुक्त मिलने के बाद चेंबर में कुर्सी पुराने तरह से ही लगा दी गयी है. इस संबंध में कर्मचारियों ने कहा कि कुर्सी की दिशा बदलने के कारण ही कई तरह की पारिवारिक विपत्ति अग्रवाल साहब को सहनी पड़ी है. ऐसे कुछ कर्मचारी इसे सिर्फ अंधविश्वास मानते हैं.
