सर्जरी व प्रत्यारोपण है बेहतर विकल्प: डाॅ अनुपम

गया : लिगामेंट सर्जरी और संपूर्ण घुटना प्रत्यारोपण का नाम आते ही अधिकतर लोग घबरा जाते हैं. लोगों को लगता है कि आॅपरेशन कराने के बाद स्थिति और भी खराब हो जायेगी. ऐसा नहीं है. इन सर्जरी को समझने की जरूरत है. उक्त बातें एशियन एंड मेट्रो अस्पताल (नयी दिल्ली) के आॅर्थोस्कोपिक- ज्वायंट रिप्लेसमेंट सर्जन […]

गया : लिगामेंट सर्जरी और संपूर्ण घुटना प्रत्यारोपण का नाम आते ही अधिकतर लोग घबरा जाते हैं. लोगों को लगता है कि आॅपरेशन कराने के बाद स्थिति और भी खराब हो जायेगी. ऐसा नहीं है. इन सर्जरी को समझने की जरूरत है. उक्त बातें एशियन एंड मेट्रो अस्पताल (नयी दिल्ली) के आॅर्थोस्कोपिक- ज्वायंट रिप्लेसमेंट सर्जन डाॅ कुमार अनुपम ने कहीं.
वह गया में लाइफ लाइन नर्सिंग होम में घुटना प्रत्यारोपण के लिए पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने इन सर्जरी पर प्रभात खबर के साथ बात की. उन्होंने बताया कि ऐसी सर्जरी से लोगों को घबराना नहीं चाहिए. सर्जरी ही परेशानियों का समाधान है. डाॅ अनुपम ने कहा कि घुटना, शरीर के दूसरे जोड़ व लिगामेंट में थोड़ी सी तकलीफ को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.उन्होंने लिगामेंट सर्जरी व घुटना प्रत्यारोपण को लेकर कई जानकारियां दी. उन्होंने कहा कि लिगामेंट या घुटने में दर्द के लिए दवाएं मिलती हैं लेकिन वह अस्थायी हैं. दवाएं कभी भी इन समस्याओं का समाधान नहीं करा सकती हैं.
उन्होंने बताया कि जवानी में कई बार पैरों में चोट लग जाती है. मोच है यह मान कर कुछ दिनों तक दवा खाते है, दर्द ठीक होने के बाद छोड़ देते हैं. लेकिन एक उम्र के बाद मुश्किलें बढ़ने लगती है. पैरों में लचक, चलते हुए अचानक से पैरों की दिशा भटक जाना, घुटनों का अटकना, जोड़ों में आवाज ऐसे कुछ लक्षण हैं जो यह बताते हैं कि समस्या गंभीर हो चुकी है. जानने वाली बात यह है कि यह समस्या अधिकतर खिलाड़ियों को होती है. इस स्थिति में भी लिगामेंट सर्जरी की जरूरत पड़ती है.
डाॅ अनुपम ने कहा कि लिगामेंट में किसी भी तरह की चोट को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह भविष्य में गंभीर परिणाम दे सकता है. उन्होंने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण की नौबत अक्सर अधिक उम्र होने पर आती है. डाॅ अनुपम ने बताया कि अधिक उम्र के बाद घुटनों में तकलीफ शुरू हो जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इंसान के पैदा लेने के बाद से ही सबसे अधिक घर्षण घुटनों में ही होता है. घुटने के दाेनों जोड़ के बीच एक लेयर होता इसे वॉशर कहते हैं.एक उम्र के बाद यह लेयर घिस-घिस कर खत्म हो जाता है.
इसके बाद घुटने की हड्डियों में घर्षण होने लगता है. यह दर्द का कारण बन जाता है. घर्षण की वजह से हड्डियों का शेप भी खराब हो जाता है. ऐसी स्थिति में संपूर्ण घुटना प्रत्यारोपण करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि अब एडवांस तकनीक हो जाने से प्रत्यारोपण की जटिलता भी समाप्त हो गयी है.
गया में भी अब ट्रांसप्लांट की सुविधा
लाइफ लाइन नर्सिंग होम के निदेशक सह प्रख्यात आॅर्थोपेडिक सर्जन डाॅ फरासत हुसैन ने बताया कि डा कुमार अनुपम के सहयोग से घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण और लिगामेंट सर्जरी की जा रही है. उन्होंने बताया कि दो साल पहले उन्होंने कोशिश की थी प्रत्यारोपण कराने की. डा कुमार अनुपम के सहयोग से प्रयास सफल रहा. अब तक 20 से अधिक लोगों का प्रत्यारोपण किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि शहर में यह सुविधा मिल जाने से निश्चित रूप से लोगों का खर्च भी कम होगा.

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