सलाह. डीएवी पब्लिक स्कूल में सेमिनार, डॉ धीरज ने बच्चों से की बात, कहा
माता-पिता और शिक्षकों से मिल दूर करें समस्या
चहारदीवारी के अंदर घिर गया बचपन
गया : बच्चों का बचपन चहारदीवारी के अंदर घिर कर रह गया है. शहरी इलाकों के मुहल्ले में स्थित छोटे-छोटे पार्कों में ही बच्चों का जीवन सिमट गया है. खेलने-कूदने की भी उन्हें पूरी आजादी नहीं मिल पा रही है. खेलने को मैदान ही नहीं हैं.
शहर की सड़कें ही बच्चों के लिए खेल के मैदान बन गयी हैं. बच्चे अपनी इच्छा के अनुसार अपना लक्ष्य भी निर्धारित नहीं कर पा रहे हैं. बच्चों से संयुक्त परिवार का साया हटा तो अकेलापन दूर करने के लिए बच्चों ने अपने हाथों में स्मार्ट फोन थाम लिया.
ऐसे में बच्चों का बचपन कैसे बीत पायेगा. इन्हीं सवालों को लेकर प्रभात खबर द्वारा शुरू किये गये बचपन बचाओ अभियान के तहत सोमवार को डीएवी पब्लिक स्कूल, रोटरी कैंपस में सेमिनार का आयोजन किया गया. वहां एक्सपर्ट के रूप में मौजूद गया कॉलेज के शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ धनंजय धीरज व प्रभात खबर के वरीय संवाददाता रोशन कुमार ने बच्चों को कई बिंदुओं पर टिप्स दिये. बच्चों से उनके बचपन से संबंधित कई बिंदुओं पर लंबी बातचीत की.
सहज भाव से दें जवाब
डॉ धनंजय धीरज ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि अपने बाल्यावस्था में बाल सहज स्वभाव से हर एक प्रश्न का उत्तर देना है. उत्तर सही हो अथवा गलत हो इस बात की बिना परवाह किये हुए बालपन की इस अवस्था को तनाव से मुक्त रखना है और भविष्य में उस सही प्रश्न का उत्तर भी ढूंढ़ना है.
प्यारे बच्चों, किसी भी शिक्षक या संबंधी द्वारा पूछे गये किसी एक प्रश्न का उत्तर न दे पाने पर आपको कहीं से शर्मिंदा होने या तनाव में आने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है.
उस प्रश्न का उत्तर न दे पाने के कई कारण हो सकते हैं. शायद आप उस प्रश्न का उत्तर जानते हों लेकिन प्रश्न ही गलत ढंग से पूछा गया हो. आप उसका उत्तर जानते हो लेकिन उस समय उस प्रश्न का उत्तर आपको याद न हो या कभी-कभी आप इस कारण से भी उत्तर नहीं देते हैं कि यदि मेरा उत्तर गलत हो गया तो क्या होगा ?
इन परिस्थितियों से आपको तनिक भी तनाव नहीं लेना है. डॉ धीरज ने कहा कि कभी-कभी एग्जाम में कम मार्क्स आने या फेल होने की स्थिति में बच्चे काफी तनाव महसूस करते हैं. किसी भी एग्जाम में कम मार्क्स आना या फेल होना, सिर्फ यह दर्शाता है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं किया गया है और आपकी परीक्षा की तैयारी में कहीं न कहीं कुछ चूक हुई है. बच्चों, असफलता ही सफलता की प्रथम सीढ़ी होती है.
जिस किसी भी विषय में आपके साथ ऐसी दिक्कत हो आपको उस विषय पर अत्यधिक समय देना चाहिए और उस विषय के विशेषज्ञ शिक्षक से मिल कर हर संभव ज्ञान को प्राप्त करना चाहिए ताकि आनेवाले जीवन में आप उस विषय में उम्दा प्रदर्शन दे सकें लेकिन ऐसी स्थितियों में आप कभी भी तनाव या डिप्रेशन का शिकार न हो. अपने माता-पिता और शिक्षकों से मिल कर इस समस्या को दूर करें. ऐसी परिस्थितियों में शिक्षक व माता-पिता की भूमिका अत्यधिक होती है, क्योंकि इन बच्चों को अधिक से अधिक अभिप्रेरित करने और सकारात्मक सोच देने की आवश्यकता होती है.
पढ़ाई के बाद जीवन का लक्ष्य क्या है : पीयूष
जवाब : इस प्रश्न के कई उतर हो सकते हैं. आपके इसी सवाल का जवाब कई लोग ढूंढ़ रहे हैं. कब्रिस्तान में लिखा रहता है- मालूम नहीं था कि अाखिरी मंजिल यही है, रास्ता ढूंढ़ते-ढूंढ़ते पूरी जिंदगी गुजर गयी.
हम सभी का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है लेकिन, उसके बारे में अभी आपको नहीं सोचना है. उन्होंने कहा कि अगर आप कोई लक्ष्य बनायेंगे तो निश्चित रूप से कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी और सिर्फ एक लक्ष्य के पीछे भागना पड़ेगा. तभी आप उस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं. आपके दूसरे सवाल का संबंध समाज से हैं. अगर आपसे ऐसे लोगों का नाम पूछा जाये, जिन्होंने अपने जीवन में बेहतर किया है.
लेकिन, इसमें सब लोग नहीं आयेंगे. हालांकि, हर व्यक्ति अपने में मंजिल पा ली. लेकिन, हम उसमें से दो-चार लोगों को ही याद रखते हैं. कुछ लोग को ही स्मरण करते हैं और कुछ लोगों की ज्यादा इज्जत करते हैं. ऐसा क्यों है? इसका कारण यह है कि ये लोग ऐसे हैं जो दूसरों से बिल्कुल भिन्न हैं. ऐसे लोगों को जीवन सिर्फ उनके लिए ही नहीं रहा.
उनका जीवन देश व समाज के हित के लिए रहा. देश, समाज व परिवार से प्यार पाने के लिए आपको कुछ अलग करना होगा. कहने का मतलब यह है कि मंजिल पाने के बाद अपने आप तक आप सीमित नहीं रहे. अपनी शक्तियों का प्रयोग अपने देश व समाज के लिए करें, ताकि आनेवाले दिनों में आपको याद किया जा सके और आपका जीवन दूसरों के लिए आइडियल बने.
भ्रष्टाचार पर कैसे अंकुश लगा सकते हैं : सौरभ
जवाब : हर जगह आप इस भ्रष्टाचार को महसूस कर सकते हैं. इसका खामियाजा भी भुगतते हैं. आपको ऐसा लगता है कि एक विद्यार्थी होने के नाते इससे कैसे लड़ सकते हैं तो आपकी सोच बड़ी है और आपका जज्बा बड़ा है.
कहीं से कोई एक व्यक्ति, एक सिस्टम या कोई संस्था भ्रष्टाचार पर राेक नहीं लगा सकता है. भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता की आवश्यकता है. अगर आपके साथ भ्रष्टाचार होता है तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि इससे कैसे लड़ सकते हैं.
अपने मौलिक अधिकारों का खुल कर प्रयोग करें. लोकतंत्र के इस व्यवस्था में अगर कही पर अापके अधिकारों का हनन होता है तो समझिए वहीं से भ्रष्टाचार शुरू हो रहा है. ख्याल रखें कि कोई घटना आपके पड़ोसी के साथ हो रही है और यह सोच कर मशगूल हैं कि यह घटना तो उनके साथ नहीं हुई है, तो हम क्यों आवाज उठाएं. इसी कारण से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है. अगर कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार से पीड़ित है तो उसके मुहिम में हम सभी को शामिल हो जाना चाहिए.
प्राचार्या ने सेमिनार की सराहना की
सेमिनार में प्रियांशु पाठक, अंकित कुमार, अंजलि राज, हर्षित सहित अन्य विद्यार्थियों ने एक्सपर्ट के समक्ष अपने जीवन से जुड़ी बिंदुओं पर सवाल किये. वहां मौजूद डीएवी पब्लिक स्कूल रोटरी कैंपस की प्राचार्या संयुक्ता गोपाल ने भी बच्चों को टिप्स दिये और प्रभात खबर द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम की सराहना की.
