Bihar Flood : गंगा के बढ़ते जलस्तर ने पटना के मरीन ड्राइव के आसपास छोटे दुकानदारों और ठेला संचालकों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है. कुछ दिन पहले तक जहां गंगा किनारे चाट, लिट्टी, चाय और खाने-पीने की दुकानें सजी रहती थीं और लोग परिवार के साथ घूमने पहुंचते थे, वहीं अब पानी का कब्जा है. कई ठेले पानी में डूब चुके हैं, जबकि कई दुकानदार अपना सामान समेटकर सुरक्षित जगह की तलाश में हैं. गंगा का जलस्तर बढ़ने से ग्राहकों की संख्या भी घट गयी है और बिक्री पर सीधा असर पड़ा है.
गंगा के बढ़ते पानी ने छीना दुकानदारों का रोजगार
मरीन ड्राइव के आसपास ठेला लगाकर परिवार चलाने वाले दुकानदारों का कहना है कि उनका पूरा रोजगार रोज की बिक्री पर निर्भर है. गंगा का पानी बढ़ने के बाद लोग यहां पहले की तरह नहीं पहुंच रहे हैं. इससे बिक्री काफी कम हो गयी है. दुकानदारों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि दुकान बंद होने पर परिवार का खर्च कैसे चलेगा. उनका कहना है कि वे रोज कमाने और खाने वाले लोग हैं और इस काम के अलावा उनके पास दूसरा कोई रोजगार नहीं है.
पानी बढ़ा तो दुकानें समेटने की मजबूरी
गंगा किनारे जिन जगहों पर पहले ठेले और छोटी दुकानें लगती थीं, वहां अब पानी पहुंच चुका है. दुकानदारों के मुताबिक, जलस्तर बढ़ने के कारण उन्हें बार-बार अपनी दुकानें और ठेले दूसरी जगह ले जाने पड़ रहे हैं. कई ठेले पानी की चपेट में आ गये हैं. कुछ दुकानदार समय रहते अपने ठेले निकाल ले गये, लेकिन जिन्हें पानी बढ़ने का अंदाजा नहीं था, उनके ठेले वहीं रह गये और डूब गये.
नीचे गंगा का पानी, ऊपर नगर निगम की कार्रवाई
दुकानदारों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वे दुकान लेकर जाएं तो जाएं कहां. गंगा के किनारे नीचे दुकान लगाने पर पानी बढ़ जाता है, जबकि ऊपर की तरफ ठेला लगाने पर नगर निगम के कर्मचारी उन्हें हटाने पहुंच जाते हैं. दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने ऊपर दो दिन दुकान लगाने की कोशिश की थी, लेकिन नगर निगम की ओर से वहां से हटने को कहा गया. ऐसे में उनके सामने दोहरी परेशानी है. नीचे गंगा का पानी दुकान डुबो रहा है और ऊपर नगर निगम की कार्रवाई का डर है.
ग्राहक नहीं आ रहे, बिक्री पर पड़ा सीधा असर
दुकानदारों का कहना है कि सुरक्षित जगह पर दुकान लगाने का विकल्प भी तभी कारगर होगा, जब वहां ग्राहक पहुंचें. प्रशासन की ओर से दूसरी तरफ जगह देने की बात कही जा रही है, लेकिन दुकानदारों का कहना है कि वहां ग्राहक नहीं आते. ऐसे में दुकान लगाने के बावजूद बिक्री नहीं होगी. एक दुकानदार ने बताया कि पानी की वजह से ग्राहक यहां आ ही नहीं रहे हैं, जिससे पहले के मुकाबले बिक्री काफी कम हो गयी है.
‘दुकान बंद हुई तो परिवार कैसे चलेगा’
ठेला संचालकों के लिए यह सिर्फ दुकान और कारोबार का संकट नहीं है, बल्कि परिवार के भरण-पोषण का सवाल है. दुकानदारों का कहना है कि वे रोज कमाकर परिवार चलाते हैं. अगर दुकान बंद हो गयी तो घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा. उनके पास दूसरा कोई रोजगार भी नहीं है. ऐसे में बाढ़ का पानी उनके लिए सीधे तौर पर रोजी-रोटी का संकट लेकर आया है.
कई ठेले पानी में डूबे, दुकानदारों को नुकसान
गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से मरीन ड्राइव के आसपास कई ठेले पानी में डूब गये हैं. कुछ ठेले खाली पड़े हैं, जबकि कई दुकानदार वहां से जा चुके हैं. दुकानदारों का कहना है कि कई लोगों को पानी बढ़ने की सही जानकारी समय पर नहीं मिल पायी. जब तक वे अपना ठेला निकालने पहुंचे, तब तक पानी काफी बढ़ चुका था. इससे उनके ठेले और सामान के नुकसान का खतरा बढ़ गया.
इस बार गंगा का जलस्तर बेहद अधिक, दुकानदारों में चिंता
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि गंगा में पहले भी पानी बढ़ता रहा है, लेकिन इस बार जलस्तर काफी अधिक है. जिन स्थानों पर पहले दुकानें और लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब पानी भरा हुआ है. गंगा के रौद्र रूप को देखकर दुकानदारों में भी चिंता बढ़ गयी है. उनके मुताबिक, अगर पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो बाकी बची दुकानें भी बंद करनी पड़ सकती हैं.
सुरक्षित जगह देने की मांग, बोले- रोजगार भी बचना चाहिए
ठेला संचालकों ने सरकार और प्रशासन से ऐसी जगह उपलब्ध कराने की मांग की है, जहां वे सुरक्षित तरीके से अपना कारोबार कर सकें. उनका कहना है कि बाढ़ के दौरान उनकी सुरक्षा जरूरी है, लेकिन उनके रोजगार का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. दुकानदार चाहते हैं कि उन्हें ऐसी जगह दी जाए जहां नगर निगम की कार्रवाई का डर न हो और ग्राहक भी आसानी से पहुंच सकें.
बाढ़ के बीच रोजी-रोटी की जंग लड़ रहे छोटे दुकानदार
गंगा का बढ़ता पानी मरीन ड्राइव की तस्वीर बदल रहा है. जहां कुछ दिन पहले तक लोग घूमते, तस्वीरें लेते और खाने-पीने का आनंद लेते थे, वहां अब पानी और डूबे हुए ठेले नजर आ रहे हैं. बाढ़ कई लोगों के लिए सिर्फ बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर है, लेकिन इन छोटे दुकानदारों के लिए यह परिवार का चूल्हा जलाने की चुनौती बन गयी है. एक तरफ गंगा का पानी उन्हें नीचे दुकान लगाने नहीं दे रहा, तो दूसरी तरफ ऊपर दुकान लगाने पर नगर निगम की कार्रवाई का डर है. ऐसे में दुकानदारों की मांग है कि प्रशासन उनके लिए सुरक्षित और व्यावहारिक जगह की व्यवस्था करे, ताकि बाढ़ के बीच भी उनकी रोजी-रोटी चलती रहे.
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