Loksabha Election: डिजिटल हुआ प्रचार, डिजिटल प्रचार में मंदा हुआ दुकानदारों का धंधा, दुकानदार निराश

लोकसभा चुनाव के डिजिटलीकरण हो जाने से सूबे मे अब दुकानदारों का धंधा काफी मंदा पड़ चुका है. जो सामान पिछले चुनावों तक धरल्ले से बिकते थे, इस चुनाव मे उनकी बिक्री काफी कम हो चुकी है.

  • सोशल मीडिया का प्रभाव : चुनाव प्रचार सामग्री से सजे दुकान सूने, बिक्री कम होने से दुकानदार मायूस
  • झंडा, टोपी, टी शर्ट, मुखौटा आदि बेचने वाले दुकानदार सोशल मीडिया को मान रहे नुकसान की वजह

Loksabha election:सूबे में चुनाव के लिए प्रचार का दौर शुरू हो गया है, लेकिन चुनाव प्रचार की सामग्री से सजी दुकानों में मायूसी छायी है. आज से 10-15 साल पहले सौ से अधिक दुकानें सजती थीं, आज महज चार- पांच दुकानें लगी हैं. इन पर अलग-अलग पार्टियों के झंडे, पट्टा, बैज, टोपी, टी शर्ट, मुखौटा, पंखा समेत अन्य प्रचार सामग्रियां हैं. मगर ग्राहकों के इंतजार में दुकानदारों की नजरें पथरा सी गयी हैं. दुकानदार बिक्री न होने से निराश हैं. इस बार पूंजी डूबने का डर है. लंगर टोली मोड़ स्थित न्यू दिलीप एंड कंपनी के प्रमुख दिलीप अग्रवाल की मानें तो सामग्री की बिक्री में गिरावट से नुकसान की एक वजह सोशल मीडिया है. उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार होने की वजह से झंडे, बैनर-पोस्टर की बिक्री में कमी आयी है.
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सूबे में सात चरणों में होने हैं चुनाव

सूबे में सात चरणों में चुनाव होने हैं. वहीं पटना जिले में चुनाव एक जून को है. ऐसे में आखिरी दिनों में चुनाव प्रचार सामग्री की बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि नया टोली से दरियापुर इलाके तक सौ से अधिक दुकानें चुनाव के दौरान सजती थीं, लेकिन अब चार- पांच दुकानें है. पहले तो दिल्ली से कारोबारी चुनाव प्रचार सामग्री बेचने आते थे, अब वे भी नहीं आते हैं. प्रचार सामग्री के कारोबारियों ने बताया कि इस वर्ष चुनाव प्रचार सामग्रियां थोड़ी महंगी हैं, क्योंकि कपड़े, प्लास्टिक और कागज के दाम बढ़े हैं. पार्टियों के झंडे पांच रुपये से 100 रुपये तक प्रति पीस में उपलब्ध है. झंडे की कीमत कपड़े की क्वालिटी पर निर्भर है. इसी तरह पट्टा सात से 20 रुपये, टोपी पांच से दस रुपये से शुरू है. इसी तरह टी-शर्ट 70 से 150 रुपये तक में मिल रहे हैं.
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अब छोटे व क्षेत्रीय पार्टियों पर टिका है कारोबार

पटना हाइकोर्ट के पास प्रचार सामग्री के विक्रेता सत्येंद्र नारायण सिंह बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह में 50 हजार रुपये तक का भी कारोबार नहीं हुआ है. एक वक्त था कि पार्टी या उम्मीदवार का ऑर्डर समय पर नहीं दे पाते थे. आज तो पार्टी के लोगों का इंतजार कर रहे हैं. गाहे-बिगाहे कोई आ जा रहा है. दस-बीस झंडा, पट्टा और गमछा खरीदता है. सिंह ने बताया कि पहले जैसा कारोबार नहीं होने का मुख्य कारण यह है कि बड़ी पार्टियां अपने उम्मीदवारों को प्रचार सामग्री मुहैया करती है. फिलहाल कारोबार छोटे और क्षेत्रीय पार्टियों पर टिका है.
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इन सामग्रियों की रहती है डिमांड

चुनाव प्रचार सामग्री में भाजपा, कांग्रेस, कम्युनिस्ट, राजद, आदि सहित अन्य छोटी पार्टियों की छोटी-बड़ी झंडियां, दुपट्टे, टी-शर्ट, टोपी, स्टॉल, हैंडबैंड, बैच, पेन आदि सामग्री मंगवाई गयी है.


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यहां- यहां से आती है चुनाव सामग्री

कपड़े का आइटम अहमदाबाद और हैदराबाद से तो पेपर और प्लास्टिक का आइटम दिल्ली से आता है.
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एक नजर में भाव प्रति पीस रुपये में

टी-शर्ट – 70- 150
कैप – 5 – 30
बैज – 5- 20
पट्टा- 7 – 20
गमछा- 60 – 80
हैंडबैंड- 6 – 8
हेलमेट- 1100
झंडा- 5- 100
पेन- 5-10
की-रिंग- 5- 10
कैलेंडर – 3- 10
मुखौटा- 5- 10
पंखा- 8 से 10


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प्रचंड गर्मी में नेताजी को ठंडा रखेगा खादी का कपड़ा

– अप्रैल व मई में चुनाव प्रचार जोर को लेकर खादी की मांग बढ़ी
– लोस चुनाव को देखते हुए खादी के दुकानों ने कॉटन कपड़ों की रेंज मंगायी



पटना जिले के दो लोकसभा सीटों पर प्रचंड गर्मी के साथ कड़कड़ाती धूप में मतदान होना है. वोटरों के मान मन्नवौल के लिए नेताओं का तपती धूप में उनके दर पर पहुंचना है. माथे पर पसीना नहीं टपके और शरीर ठंडा रहे इसलिए उम्मीदवार ही नहीं, उनके समर्थक भी खादी और सूती कपड़ों को पसंद कर रहे हैं. ऐसे में शहर के खादी दुकानदारों के पास लिनेन कॉटन कपड़ों की मांग बढ़ गयी है. चुनाव को लेकर मौर्या लोक खादी भंडार दुकानों से लेकर गांधी मैदान और वीरचंद्र पटेल पथ स्थित दुकानों पर लिनन क्लब में सूती कपड़ों की नयी रेंज आ गयी हैं.
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राजनीतिक दल को सूट करने वाले रंग के कपड़ों की मांग

पटना जिले की दो लोकसभा सीट पर आगामी एक जून को वोटिंग होनी है. गर्मी और सर्दी में नेताओं के कपड़ों को पहनने का अलग अंदाज रहा है. पहले नेता सफेद कुर्ता और पायजामा ही पहनते थे. एक दौर यह भी आया कि नेता राजनीतिक दल की सूट करने वाले रंग के कपड़ों को तरजीह देते हैं. मसलन, भाजपा से जुड़े नेता भगवा, आरजेडी से जुड़े नेता हरा, जदूय का हरा व सफेद और कांग्रेस पार्टी का लाल, हरा व सफेद मिक्स रंग के कपड़े होते हैं. लेकिन अब नेताओं को कपड़े के रंग से पहचानने का दौर नहीं रहा. नेता हर रंग के कपड़ों को पसंद कर रहे हैं.


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बंगाल के कतिया और मटका रेशम कपड़े की मांग

खादी के कपड़ा नेताओं की पहली पसंद रही है. डिमांड को देखते हुए खादी दुकानदारों ने कपड़ों की लंबी रंज भी मंगा ली है. वीरचंद्र पथ पटेल, गांधी मैदान व मौर्यालोक परिसर में संचालित खादी दुकानों पर रेडीमेड जैकेट, सदरी से लेकर कुर्ता, पैजामा की लंबी रेंज नजर आ रही है. सूती कपड़ा 350 से लेकर 500 रुपये मीटर तक उपलब्ध है. सर्वाधिक मांग मसलिन खादी की दिखती है. बंगाल का मटका और कतिया खादी 1650 रुपये से लेकर 3200 रुपये मीटर तक उपलब्ध है. वीरचंद्र पटेल पथ स्थित कपड़े के कारोबारी मो. कलीम कहते हैं कि बंगाल व बेंगलुरु से कपड़ों की अच्छी रेंज मंगायी गयी है. अभी विभिन्न राजनीतिक दलों के ज्यादातर नेता खादी के सूती और रेशम कपड़ों को पसंद करते हैं.
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आचार संहिता लागू होने के बाद सरगर्मी बढ़ गयी है

चुनाव आचार संहिता के लागू होने के बाद प्रचार की सरगर्मी बढ़ गयी है. अगले 10 दिन के अंदर प्रचार-प्रसार और तेज हो जायेगा. अभी से गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है और पटना जिले में अंतिम दौर में मतदान है. ऐसे में गर्मी राहत देने वाले सूती व असली खादी के कपड़ों की मांग हम नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच और बढ़ जायेगी. खादी दुकानों में मैं खुद 15 से अधिक कपड़ों की आर्डर दिये हैं.
– अजीत यादव, युवा नेता
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सूती कपड़ों की है अधिक बिक्री

सूती कपड़ों की रेंज 1500 से लेकर 7000 रुपये मीटर तक है. सर्वाधिक बिक्री 1500 से 2500 रुपये मीटर वाले सूती कपड़ों की है. नेता आराम को देखते हुए कुर्ता के साथ सूती कपड़े की ही पेंट सिलवा हरे हैं. एक सेट पर करीब 5000 से 12500 रुपये तक आता है. पहले एक नेता जहां साल में दो से तीन कपड़े का आर्डर देते थे अब 10 से 15 आर्डर दे रहे हैं.
– मो नौशाद, कपड़ा व्यापारी.

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Author: Ravi Ranjan

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