Kamtaul Weather Crisis: दरभंगा जिले के कमतौल और आसपास के इलाकों में पिछले तीन दिनों से बादल, धूप और बारिश का अजीब खेल चल रहा है. सुबह के समय आसमान में घने बादल छा रहे हैं, तो दोपहर होते ही कड़ी धूप लोगों को परेशान कर रही है. वहीं रात के समय रिमझिम बारिश हो रही है, लेकिन इस बदलते मौसम से स्थानीय किसानों को कोई राहत नहीं मिली है. स्थिति यह है कि रिमझिम फुहारों के बीच खेत अब भी प्यासे हैं, जबकि इसके विपरीत ग्रामीण सड़कों और बाजारों में कीचड़ व जलजमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है.
72 घंटे में महज 18 मिमी बारिश, रोपनी के लिए पानी नाकाफी
मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 72 घंटों के दौरान जिले में औसतन केवल 18 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. कृषि विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि यह बारिश धान की मुख्य रोपनी के लिए बिल्कुल नाकाफी है. रात में जो हल्की बारिश हो रही है, उसका पानी खेतों की गहराई तक नहीं पहुंच पा रहा है. लंबे समय से तेज धूप के कारण जमीन इतनी अधिक सूखी है कि गिरते ही पानी को सोख ले रही है, जिससे धान की खेती को लेकर किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है.
सरकारी नलकूप बंद, महंगे डीजल से पटवन करने को मजबूर किसान
संकट के इस समय में कमतौल और अहियारी क्षेत्र के अधिकांश सरकारी नलकूप अब भी पूरी तरह बंद पड़े हैं. ऐसे में जिन किसानों के पास निजी बोरिंग की सुविधा उपलब्ध है, वे महंगे डीजल या बिजली के सहारे अपने खेतों का पटवन करने को विवश हैं. अहियारी गांव के किसान राघवेंद्र ठाकुर ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि रात को थोड़ी बारिश होती है, लेकिन सुबह होते-होते कड़ाके की धूप से खेत फिर से पूरी तरह सूख जाते हैं. बाजार में डीजल सौ रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जिससे पटवन की लागत बहुत अधिक आ रही है.
बाजारों में जलजमाव से बढ़ी परेशानी, मूसलाधार बारिश का इंतजार
एक तरफ खेतों को पानी नहीं मिल रहा है, तो दूसरी तरफ कमतौल बाजार जाने वाली मुख्य सड़क पर जगह-जगह गंदा पानी और कीचड़ जमा हो गया है. कई मोहल्लों में नालियां जाम होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे स्कूली बच्चों और मरीजों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को कम पानी वाली धान की किस्में लगाने की सलाह दी है. किसानों का कहना है कि अगर अगले एक सप्ताह में मूसलाधार बारिश नहीं हुई, तो इस बार धान की रोपनी आधी भी नहीं हो पाएगी.
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