Darbhanga News: दीपावली-छठ पर घर लौटने के लिए आवक गाड़ियों में वेटिंग टिकट भी नहीं

Darbhanga News:अपनों संग प्रकाश पर्व दीपावली तथा लोक आस्था का महापर्व छठ मनाने का परदेसियों का सपना टूटता नजर आ रहा है.

Darbhanga News: दरभंगा. अपनों संग प्रकाश पर्व दीपावली तथा लोक आस्था का महापर्व छठ मनाने का परदेसियों का सपना टूटता नजर आ रहा है. लंबी दूरी की प्राय: किसी भी नियमित आवक ट्रेनों में आरक्षण टिकट नहीं मिल रहा है. रेलवे की ओर से चलायी जा रही पूजा स्पेशल गाड़ियों के भी सभी बर्थ फुल हो चुके हैं. अंतिम समय में विशेष ट्रेन दिये जाने की परदेस में रहनेवाले राह देख रहे हैं. हालांकि रेलवे के सिस्टम में ट्रेन की फीड होते ही जिस रफ्तार में टिकट बुक हो जाते हैं, उससे आम यात्रियों के लिए ऐसी गाड़ियों में भी आरक्षण मिल पाना कठिन ही दिख रहा है. उल्लेखनीय है कि दीपोत्सव 20 अक्तूबर को है, वहीं लोक आस्था का चार दिवसीय पर्व छठ की शुरूआत नहाय-खाय के साथ आगामी 25 अक्तूबर को हो रही है. मिथिला क्षेत्र के प्राय: सभी परिवार के सदस्य दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद सरीखे महानगरों में रहते हैं. होली व छठ के मौके पर अपने परिजनों के संग पर्व मनाते हैं, लिहाजा इन मौकों पर आवक गाड़ियों में भीड़ में अप्रत्याशित भीड़ बढ़ जाती है.

प्रथम श्रेणी तक में वेटिंग रिग्रेट

स्थिति इतनी विकट है कि एसी प्रथम श्रेणी तक में वेटिंग रिग्रेट चल रहा है. आगामी 25-26 अक्तूबर तक किसी भी नियमित ट्रेन में वेटिंग टिकट तक नहीं मिल रहा है. बता दें कि पहले ट्रेन की क्षमता से काफी अधिक वेटिंग टिकट जारी किया जाता है, लेकिन पिछले दिनों रेलवे ने सफर करनेवाले यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसमें कटौती कर दी. अब एसी कोच की विभिन्न श्रेणियों के लिए बर्थ से 60 प्रतिशत, जबकि स्पीलर क्लास के लिए क्षमता से 30 फीसद अधिक वेटिंग ही जारी किया जाता है. इस वजह से बिहार संपर्क क्रांति, स्वतंत्रता सेनानी, गरीब रथ, पवन एक्सप्रेस, सिकंदराबाद एक्सप्रेस, ज्ञान गंगा एक्सप्रेस, गंगासागर एक्सप्रेस में वेटिंग मिलना बंद है.

स्पेशल ट्रेन को तरजीह नहीं देते यात्री

प्राय: सभी विशेष मौकों पर रेलवे यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर रेलवे स्पेशल ट्रेन चलाता है, लेकिन लेट-लतीफी चरम पर रहने की वजह से यात्री इन गाड़ियों से सफर नहीं करना चाहते. बता दें कि विशेष गाड़ियां कितना विलंब से पहुंचेगी, यह तय नहीं रहता. दूसरा उसमें खान-पान, सफाई आदि की व्यवस्था लचर ही रहती है. इस वजह से मजबूरन ही यात्री इसमें यात्रा करते हैं.

गांव में रहनेवाले परिजनों में निराशा

दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययनरत बेटे को किसी भी ट्रेन में आरक्षण नहीं मिलने के कारण निराश आरती कुमारी ने बताया कि लगता है अकेले ही पर्व मनाना पड़ेगा. रेलवे को जल्द इस पर ध्यान देना चाहिए. इसी तरह बेंगलुरू में नौकरी करनेवाले अजित झा के परिजन भी निराश हैं. सबकी नजर अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन पर टिकी है.

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Author: PRABHAT KUMAR

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