Darbhanga News: दरभंगा. अल्लामा इकबाल लाइब्रेरी, बीबी पाकर में प्रो. शाकिर खलीक की हिंदी पुस्तक सद्भावना के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए लनामिवि के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ प्रभाकर पाठक ने कहा कि भारत की आत्मा सद्भावना में बसती है. इसी भावना को प्रो. शाकिर खलीक ने न केवल अपने जीवन में जिया है, बल्कि उसे साहित्यिक रूप भी दिया है. यह पुस्तक प्रो. खलीक की संघर्षगाथा है, जो उनकी बौद्धिक, साहित्यिक, सामाजिक और राजनीतिक सेवाओं को उजागर करती है. उन्होंने इस पुस्तक को गुलदस्ता बताते हुए कहा इसमें विविध रंगों की खुशबू है. कार्यक्रम में वार्ड पार्षद नवीन सिन्हा ने कहा कि प्रो. शाकिर खलीक हर वर्ग में लोकप्रिय रहे हैं और शिक्षक व सीसीडीसी के रूप में समाज पर गहरी छाप छोड़ी है. गुरुद्वारा मिर्जापुर चौक के ग्रंथी तनविंदर हैप्पी सिंह ने कहा कि हर धर्म मिल- जुलकर रहने और प्रेम का संदेश देता है. कहा कि प्रो. खलीक की यह पुस्तक उसी संदेश को समाज में फैलाती है. डिप्टी मेयर नाज़िया हसन ने कहा कि प्रो. खलीक ने शिक्षक के साथ- साथ समाज में अभिभावक की भूमिका निभाई है. डॉ अब्दुल वुहूद क़ासमी ने कहा सद्भावना भारत की सच्ची तस्वीर पेश करती है. साहित्य का कार्य प्रेम का संदेश फैलाना है. माहद अल-तैयबात के सचिव मुफ्ती आफ़ताब ग़ाज़ी ने कहा प्रो. खलीक दरभंगा की संस्कृति और इतिहास के संरक्षक हैं. मंजर सिद्दीकी ने भी विचार रखा. इससे पहले अफ़ज़ाल शाकिर और ज़ैनब फ़ातिमा ने अतिथियों का स्वागत किया. संचालन एहतेशामुल हक ने किया. कार्यक्रम में डॉ अहमद नसीम आरज़ू, डॉ हिना आरज़ू, डॉ अजमी अजीर, मास्टर आरिफ़ इक़बाल, एहसान मुकर्रमपुरी, एजाज़ अहमद, डॉ मोहम्मद बदरुद्दीन, मास्टर गुल अहमद, डॉ मंसूर खुश्तर, मुजाहिद मौजूद थे.
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