Darbhanga News: अतिक्रमण से सिकुड़ता जा रहा अलीनगर के ऐतिहासिक राजस्व हाट का आकार

Darbhanga News:अंचल मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक राजस्व हाट का स्वरूप अतिक्रमण के कारण सिकुड़ गया है.

Darbhanga News: अलीनगर. अंचल मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक राजस्व हाट का स्वरूप अतिक्रमण के कारण सिकुड़ गया है. हाट मैदान तथा इसके इर्द-गिर्द कचरा व गंदगी का अंबार लग गया है. इसक कारण लोगों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा लग रहा है कि मानो गांव का सारा कचरा इसी मैदान में फेंक दिया जाता है. बुजुर्गों की मानें तो हाट का इतिहास 150 वर्ष से अधिक पुराना है. क्षेत्र में जब दूर-दूर तक कहीं कोई हाट नहीं लगता था, उस समय स्थानीय जमींदारों ने 19 वीं शताब्दी के अंत में अपनी जमीन पर हाट शुरू की. इसका रकबा चार एकड़ 42 डिसमिल है, जो अतिक्रमण के कारण अब करीब तीन एकड़ ही रह गया है. बुजुर्गों के अनुसार इस हाट में जरूरत के प्रायः सभी सामान राशन, कपड़े, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी के सामान, हल, पालो, हरीश, लगना, हंसुआ, खुरपी, मवेशियों में बैल, गाय, सब्जियां आदि मिला करती थी. कोसों दूर से ग्राहक व व्यापारी यहां आते थे. व्यापारी कटही बैल गाड़ी व घोड़ी से सामान लाते थे. चार दशक पहले तक कमोबेश वह स्थिति बनी हुई थी, परंतु वर्तमान में इस हाट से लेकर क्षेत्र के अन्य सभी हाटों में कई चीजों की बिक्री भी बंद हो चुकी है. इसका मुख्य कारण यांत्रिक क्रांति के साथ गांव-गांव में छोटे-छोटे मार्केट तथा व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का आकार लेना है. हाट में अब केवल सब्जियां, फल, मसाला, मछली आदि की बिक्री होती है. छठ महापर्व पर तो हाट का आकार बड़ा हो जाता था.

बना दिये गये कई सरकारी भवन

इस राजस्व हाट की जमीन में पंचायत भवन, दो सामुदायिक भवन, एक ट्राइसम भवन, एक किसान भवन व प्रतिनिधि भवन का निर्माण हुआ. इसमें दशकों तक अंचल, प्रखंड व थाना का कार्यालय संचालित होता रहा. बाद में धीरे-धीरे हाट की जमीन पर दर्जन भर कच्चे मकान के साथ दर्जन भर कटघरे लगा लोग व्यवसाय कर रहे हैं. हालांकि डेढ़ महीना पहले अतिक्रमणकारियों के बीच एक बड़ा विवाद भी हुआ था. इसे लेकर सीओ द्वारा चार दर्जन से अधिक लोगों पर प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी थी. अंचल प्रशासन हाट की जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की तैयारी में भी हैं, लेकिन इसमें कितना समय लगेगा, कहा नहीं जा सकता. हाट मैदान का खेल प्रेमी क्रिकेट तथा कबड्डी आदि खेल में उपयोग करते थे, परंतु कचरे व गंदगी के कारण अब खेलप्रेमी मैदान की ओर अपनी नजर भी नहीं कर रहे हैं.

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Author: PRABHAT KUMAR

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