कमतौल में सूखे जैसे हालात, खेतों में दरार देख किसानों की बढ़ी चिंता

कमतौल में पांच मिनट की रिमझिम बारिश के बाद फिर सूखे जैसे हालात बन गए हैं. खेतों में दरारें और पीली पड़ती धान की फसल देखकर किसानों को अपनी मेहनत और पूंजी डूबने की चिंता सताने लगी है.

दरभंगा वेदर: मानसून की बेरुखी ने कमतौल इलाके के किसानों की चिंता बढ़ा दी है. पूरा सावन लगभग सूखा गुजरने के बाद किसानों को भादो में अच्छी बारिश की उम्मीद थी, लेकिन महीने की शुरुआत में भी राहत नहीं मिली. रविवार दोपहर आसमान में काले बादल जरूर घिरे, लेकिन महज पांच मिनट की रिमझिम बारिश के बाद बादल बिखर गए. बारिश की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के हाथ फिर निराशा लगी.

खेतों में अब भी बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं. पर्याप्त पानी नहीं मिलने से धान के पौधे पीले पड़ने लगे हैं और कई जगह फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है. किसानों का कहना है कि एक-दो दिनों के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो उनकी मेहनत और खेती में लगाई गई पूंजी दोनों पर संकट आ सकता है.

कर्ज लेकर कराई थी धान की रोपनी

इलाके के कई किसानों ने कर्ज लेकर डीजल पंप से खेतों की पटवन कर धान की रोपनी कराई थी. अब पानी की कमी के कारण वही फसल सूखने लगी है. किसानों को डर है कि यदि जल्द मूसलधार बारिश नहीं हुई तो रोपनी पर किया गया पूरा खर्च डूब सकता है.

सूखे जैसे हालात के बीच सिंचाई की व्यवस्था भी किसानों के लिए मुश्किल बन रही है. बिजली की लगातार ट्रिपिंग के कारण कई जगह पंप सही तरीके से नहीं चल पा रहे हैं. वहीं भूगर्भीय जलस्तर नीचे जाने से चापाकलों ने भी जवाब देना शुरू कर दिया है.

कई इलाकों में टैंकर से पानी की नौबत

नगर पंचायत कमतौल अहियारी के वार्ड 11 समेत कई इलाकों में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है. हालात ऐसे बन रहे हैं कि लोगों को टैंकर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है. लगातार बारिश नहीं होने से केवल खेती ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है.

लोगों का कहना है कि इस समय चिलचिलाती धूप और उमस ने परेशानी बढ़ा दी है. दोपहर के समय बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहता है. गर्मी और उमस के कारण लोग जरूरी काम से ही घरों से बाहर निकल रहे हैं.

आसमान की ओर टिकी किसानों की नजर

रविवार को काले बादल देखकर किसानों को लगा था कि लंबे इंतजार के बाद झमाझम बारिश होगी और सूखी धरती को राहत मिलेगी. लेकिन पांच मिनट की हल्की बारिश खेतों की प्यास बुझाने के लिए नाकाफी साबित हुई. खेतों में दरारें जस की तस बनी हुई हैं.

किसान अब लगातार आसमान की ओर नजर लगाए हुए हैं. उनका कहना है कि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा. सूखे की मार से इंसानों के साथ पशु-पक्षी भी परेशान हैं. किसान अब उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी और खेतों में फिर से हरियाली लौटेगी.

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By Shivendra kumar shar

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