Darbhanga News: मनीगाछी. राष्ट्रपति व साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित रामजी ठाकुर का गुरुवार को निधन हो गया. वे कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. इलाज के लिए वे झंझारपुर जा रहे थे, इसी बीच रास्ते में ही उनका निधन हो गया. डाॅ ठाकुर दो दर्जन से अधिक काव्य संग्रह, खण्ड काव्य, महाकाव्य की संस्कृत भाषा में रचना की. साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा इनकी मूल संस्कृत प्रबंध काव्य लघु प्रबंधतयी पर वर्ष 2012 में तथा वर्ष 2018 में संस्कृत वांग्मयी में अवर्णीय योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा इन्हें सम्मानित किया गया. 1995 में लनमिवि के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में उपप्राचार्य व विश्वविद्यालय प्राध्यापक पद से अवकाश ग्रहण किया था. उनके निधन पर डाॅ इंद्रनाथ झा, डाॅ अमृतनाथ झा, डाॅ सतीरमण झा, पं. कमलजी झा, पं. लक्ष्मण झा, डाॅ मित्रनाथ झा, डाॅ काशीनाथ झा, विनोद कुमार, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डाॅ किशोरनाथ झा सहित कई लोगो ने शोक संवेदना व्यक्त की है. वे अपने पीछे चार पुत्री, दौहित्र सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं. .मुखाग्नि दौहित्र सुजीत मिश्र ने दी.
शिक्षा व साहित्यजगत में शोक की लहर
तारडीह. राष्ट्रपति सहित दर्जनों सम्मान से सम्मानित लेखक, साहित्यकार, नाट्य गीत रचनाकार, अनुवादक डॉ रामजी ठाकुर के निधन पर क्षेत्र के शिक्षा व साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गयी है. कनकपुर निवासी साहित्यकार नवीन आशा ने बताया कि अपनी पहली पुस्तक जिनगी के सच का आशीर्वचन पुस्तक डॉ ठाकुर के प्रेरणा से ही लिख सका था. उनके निधन पर साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित डॉ खुशीलाल झा, जगदीश नारायण ब्रह्मचर्य आश्रम सह आदर्श संस्कृत महाविद्यालय लगमा के प्रधानाचार्य डॉ सदानंद झा, लखनजी चौधरी, डॉ सोनी झा, पूर्व प्राचार्य डॉ शुभ कुमार वर्णवाल, युवा सामाजिक संगठन उजान के विनोदानंद मिश्र, मदन मोहन झा, रमाकांत चौधरी, पुरुषोत्तम कुमार, रोशन मंडल आदि ने शोक व्यक्त किया है.
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