दरभंगा: संस्कृत शिक्षा को आधुनिक स्वरूप देने के लिए बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड नई पहल शुरू करने की तैयारी में है. बोर्ड ने प्रदेश में करीब डेढ़ लाख विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जा रही है.
50 संस्कृत विद्यालयों को मॉडल प्लस टू बनाने की तैयारी
जिला संस्कृत सह माध्यमिक शिक्षक संघ के कार्यक्रम में पहुंचे बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा ने कहा कि 50 संस्कृत विद्यालयों को मॉडल प्लस टू स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है. इसके लिए केंद्र सरकार को प्रति विद्यालय दो करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर बजट का प्रस्ताव भेजा गया है.
उन्होंने कहा कि नियोजित एवं नियमित शिक्षकों के वेतन और पेंशन से जुड़े मामलों को राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग के समक्ष प्रमुखता से उठाया गया है.
27 साल बाद बदला गया संस्कृत पाठ्यक्रम
बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि करीब 27 वर्षों बाद संस्कृत पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कर्मकांड, ज्योतिष और आयुर्वेद जैसे व्यावहारिक विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है. इससे संस्कृत शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी और रोजगारपरक बनाने का प्रयास किया जा रहा है.
27 दिनों में 87 प्रतिशत परीक्षा परिणाम जारी
मृत्युंजय झा ने कहा कि महज 27 दिनों में 87 प्रतिशत परीक्षा परिणाम जारी करना बोर्ड की महत्वपूर्ण उपलब्धि है. विद्यार्थियों को अतिरिक्त अवसर देने के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा भी शुरू की गयी है.
उन्होंने कहा कि बोर्ड संस्कृत शिक्षा को तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रहा है. विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के साथ डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की योजना पर तैयारी चल रही है.
35 शिक्षकों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान 35 शिक्षकों को सम्मानित किया गया. मौके पर अरुण झा, डॉ अनिल कुमार ईश्वर, विजय मिश्रा, भवेश्वर सिंह, अमित कुमार दुबे, समीर कुमार सहित कई लोग मौजूद थे.
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