दरभंगा में रक्षाबंधन: "मां, सुबह में मुझे जरा सवेरे जगा देना." अपनी मां को बार-बार यह बात याद दिलाने वाली नन्ही गुड़िया महिमा शुक्रवार की सुबह खुद सबसे पहले बिस्तर से उठ गई. घर के बाकी सदस्य अभी जागे भी नहीं थे कि महिमा नहा-धोकर तैयार हो गई और पूजा घर में पहुंचकर राखी की थाल सजाने लगी. रोली, चंदन, अक्षत, घी का दीपक और मिठाई से सजी थाल लेकर वह भाई के पास पहुंची और पूरे विधि-विधान से उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा. नए परिधान में सजी महिमा की खुशी ने घर के उत्सवी माहौल को और खास बना दिया.
यह दृश्य सिर्फ एक परिवार का नहीं था. दरभंगा के कई घरों में शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर कुछ ऐसा ही उत्साह देखने को मिला. बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना की, वहीं भाइयों ने जीवनभर बहनों की रक्षा और साथ निभाने का वचन दिया.
भाई के आने का बेसब्री से इंतजार
खासकर ससुराल में रहने वाली बहनों को मायके से भाई के आने का बेसब्री से इंतजार रहा. सुबह से ही कई बहनों की निगाहें घर के दरवाजे पर टिकी रहीं. भाई के पहुंचते ही उनकी खुशी देखते ही बनी.
कहीं बहनों ने भाई की पसंद के पकवान तैयार किए, तो कहीं भाई बहनों के लिए उनकी पसंद का उपहार और मिठाई लेकर पहुंचे. तिलक, आरती, राखी और मिठाई के बीच भाई-बहन के रिश्ते की मिठास हर घर में नजर आई.
मिथिला में निर्जीव वस्तुओं को भी बांधी जाती है राखी
मिथिला में रक्षाबंधन की परंपरा केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं है. इस पर्व पर जीवन में उपयोग आने वाली महत्वपूर्ण निर्जीव वस्तुओं के प्रति भी सम्मान और सुरक्षा की भावना दिखाई देती है.
घर में इस्तेमाल होने वाले सामान, कृषि उपकरण, वाहन और अन्य उपयोगी वस्तुओं पर भी परंपरा के अनुसार रक्षा सूत्र बांधा गया. लोगों ने इन वस्तुओं की सुरक्षा और मंगलकामना की. वहीं भगवान को विशेष राखी अर्पित कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना की गई. इस परंपरा में धार्मिक आस्था और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला.
मिठाई और दूध-दही की दुकानों पर लगी कतार
रक्षाबंधन को लेकर शुक्रवार सुबह से ही दरभंगा के बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई. मिठाई, दूध, दही और पनीर की दुकानों पर ग्राहकों की कतार लगी रही. लोग राखी के साथ मिठाई और पूजा की सामग्री खरीदते नजर आए.
सावन पूर्णिमा के अवसर पर मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही. लोगों ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. भाई-बहन के अटूट प्रेम, धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच रक्षाबंधन का पर्व दरभंगा में उल्लास के साथ मनाया गया.
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