आर्द्रा और पुनर्वसु सूखा बीता, अब पुख नक्षत्र और मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर टिकी किसानों की उम्मीदें

मिथिलांचल का कृषि प्रधान क्षेत्र कमतौल सूखे की मार झेल रहा है. आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्र सूखा बीत जाने के बाद किसानों की सारी उम्मीदें अब पुख नक्षत्र पर टिकी हैं. सरकारी नलकूप बंद होने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है.

Kamtaul Agriculture Crisis: मिथिलांचल के कृषि प्रधान क्षेत्र कमतौल और आसपास के इलाकों में आर्द्रा नक्षत्र पूरी तरह सूखा बीत चुका है और अब पुनर्वसु नक्षत्र भी विदा होने को तैयार है. आसमान में बादल तो रोज आ रहे हैं, लेकिन बिना बरसे ही लौट जा रहे हैं. इस सूखे जैसे हालात के बीच अब स्थानीय किसानों की सारी उम्मीदें आगामी पुख नक्षत्र पर आकर टिक गई हैं. ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों की एक प्रसिद्ध कहावत है कि "पुख न राखे रुख", जिसका अर्थ है कि पुख नक्षत्र में होने वाली भारी बारिश फसलों का पूरा रुख बदल देती है और जमीन का कोई भी हिस्सा सूखा नहीं रहने देती. इसी आस में क्षेत्र के अन्नदाता प्रतिदिन टकटकी लगाए आसमान की ओर देख रहे हैं.

बीस दिनों से नाममात्र की बारिश, सरकारी नलकूप बंद होने से बढ़ी परेशानी

पिछले बीस दिनों के दौरान क्षेत्र में केवल नाममात्र की छिटपुट वर्षा दर्ज की गई है, जो धान की मुख्य रोपनी के लिए बिल्कुल नाकाफी साबित हो रही है. संकट की इस घड़ी में अहियारी और कमतौल के सरकारी नलकूप पूरी तरह बंद पड़े हैं. लाचार होकर किसान सौ रुपये प्रति लीटर की दर से महंगा डीजल खरीदकर निजी बोरिंग से खेतों का पटवन करने को मजबूर हैं. स्थिति यह है कि एक बीघा खेत की सिंचाई करने में ही डेढ़ से दो हजार रुपये तक का अतिरिक्त नगद खर्च बैठ रहा है. भारी लागत के बावजूद अब तक क्षेत्र में महज चालीस प्रतिशत धान की रोपनी ही पूरी हो सकी है.

नर्सरी हुई 30 दिन से अधिक की, उपज घटने की आशंका से कृषि विभाग चिंतित

कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खेतों में तैयार धान की नर्सरी (बिचड़ा) अब तीस दिनों से अधिक की हो चुकी है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोपनी में और अधिक देरी हुई, तो मुख्य उपज में भारी गिरावट आने का डर है. स्थिति को देखते हुए विभाग ने किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्में लगाने और धान की सीधी बिजाई (ड्रम सीडर या जीरो टिलेज) करने की सलाह दी है.

मजदूरों की भारी किल्लत, पलायन के बाद महिलाओं ने संभाली खेतों की कमान

क्षेत्र में सूखे के साथ-साथ मजदूरों की भारी किल्लत भी एक बड़ी समस्या बन गई है. जो गिने-चुने मजदूर मिल भी रहे हैं, वे दो सौ रुपये प्रति कट्ठा की ऊंची मजदूरी मांग रहे हैं और तीन-चार दिन बाद का समय दे रहे हैं. गांव के अधिकांश पुरुष काम की तलाश में मद्रास, दिल्ली और पंजाब जैसे बाहरी राज्यों में पलायन कर चुके हैं. ऐसे में अब ग्रामीण महिलाओं ने ही समूह बनाकर खेतों में धान रोपनी की पूरी कमान संभाल ली है. अहियारी गोट के किसान अरुण राय ने बताया कि वे कर्ज लेकर किसी तरह पटवन कर रहे हैं. वहीं चनुआटोल की सुनीता देवी ने कहा कि महिलाएं सुबह पांच बजे से ही खेतों में उतरकर भगवान से पुख नक्षत्र में अच्छी बारिश की दुआ मांग रही हैं. वैसे मौसम विभाग ने 22 से 26 जुलाई के बीच मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है, जो कि पुख नक्षत्र की ही अवधि है. अब देखना होगा कि यह नक्षत्र किसानों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है.

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