प्रतिनिधि, कमतौल. आर्द्रा बीत गया. पुनर्वसु भी जाने को तैयार है, लेकिन बादल सिर्फ आकर लौट जा रहे है. अब किसानों की सारी उम्मीदें पुख नक्षत्र पर टिकी हैं. गांव में बुजुर्ग कहते हैं \"पुख न राखे रुख \" यानी पुख में हुई बारिश फसल का रुख बदल देती है. जमीन का कोई भी हिस्सा सूखा नहीं रहता. बारिश से गीला हो जाता है. इसी आस में किसान रोज आसमान ताक रहे हैं. पिछले बीस दिनों में सिर्फ नाममात्र की बारिश हुई है. यह रोपनी के लिए नाकाफी है. अहियारी और कमतौल में सरकारी नलकूप बंद हैं. किसान सौ रुपये लीटर डीजल खरीद कर पटवन कर रहे हैं. एक बीघा की सिंचाई में डेढ़ से दो हजार रुपये तक खर्च हो जा रहा है. इसके बाद भी सिर्फ चालीस प्रतिशत रोपनी हो पाई है. कृषि विभाग के अनुसार धान की नर्सरी अब तीस दिन से ज्यादा की हो गई है. देर होने पर उपज घटने का डर है. विभाग ने किसानों को कम अवधि वाली धान और सीधी बिजाई की सलाह दी है. अहियारी में मजदूरों की भी किल्लत है. जो मिल रहे हैं वे दो सौ रुपये प्रति कट्ठा मांग रहे हैं और तीन चार दिन बाद का समय दे रहे हैं. गांव के पुरुष मद्रास, दिल्ली और पंजाब चले गए हैं. अब महिलाएं ही समूह बना कर रोपनी कर रही हैं. अहियारी गोट के किसान अरुण राय कहते हैं कि कर्ज लेकर पटवन कर रहे हैं. अगर पुख में तीन दिन अच्छी बारिश हो जाए तो खर्च बच जाएगा. चनुआटोल की सुनीता देवी ने कहा कि महिलाएं सुबह पांच बजे से खेत में उतरती हैं और भगवान से पुख में पानी की दुआ मांग रही हैं. वैसे मौसम विभाग ने 22 से 26 जुलाई के बीच मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान दिया है. यही अवधि पुख नक्षत्र की है. अब सवाल यही है कि क्या पुख नक्षत्र इस बार किसानों की उम्मीद पर खरा उतरेगा. अगर हां, तो खेतों में हरियाली लौटेगी. नहीं तो कर्ज और महंगी रोपनी किसानों की कमर तोड़ देगी.
पुख नक्षत्र किसानों की उम्मीद पर खरा उतरेगा!

आर्द्रा और पुनर्वसु सूखा बीता, अब पुख नक्षत्र और मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर टिकी किसानों की उम्मीदें
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आर्द्रा और पुनर्वसु के बाद अब किसानों की नजरें पुख नक्षत्र पर टिकी हैं। क्या पुख में होने वाली बारिश धान की रोपनी और किसानों की मेहनत को बचा पाएगी?