Darbhanga News: बेनीपुर. मानसून की बेरुखी के कारण विगत एक माह से बारिश नहीं हो रहा है. इसके कारण इस वर्ष धान की फसल पर ग्रहण सा लगता दिखने लगा है. बारिश के अभाव में खेतों में दरारें पड़ने लगी है. धान के पौधे झुलस रहे हैं. इसे देख अब किसानों के कलेजे धड़कने लगे हैं. हालांकि आशावादी किसान निजी पंपसेट के सहारे पटवन कर फसल को बचाने में लगे हुए हैं. किसान शंकर सिंह, डोमू सिंह, शिवनंदन सदा, संतोष झा आदि ने कहा कि इस वर्ष शुरूआत से ही मानसून किसानों को धोखा दे रही है. जैसे-तैसे किसानों ने धान की रोपनी की. बीच में कुछ बारिश होने से फसल होने की उम्मीद जगी, लेकिन अगस्त व सितंबर माह में बारिश नहीं होने के कारण एक बार फिर किसानों के सामने अब फसल बचाने की चुनौती बन गयी है. किसानों का कहना है कि मघा नक्षत्र में जमकर बारिश हुई रहती तो धान की अच्छी फसल होती. मघा नक्षत्र में बारिश नहीं होने के कारण अब फसल बचाना किसानों के लिए टेढी खीर साबित हो रही है. हालांकि साधन संपन्न किसान इसे बचाने में दिन-रात जुटे हुए हैं, लेकिन संसाधन विहीन किसान हिम्मत हार चुके हैं. किसानों का कहना है कि सरकारी सभी राजकीय नलकूप बंद पड़े हुए हैं. इसे चालू कर दिया गया रहता तो इस समय किसानों को लाभ मिलता. बारिश नहीं होने पर अब तो धान के साथ-साथ रबी फसल की आस भी छिन्न होती जा रही है. इधर सरकारी स्तर पर बंद पड़े राजकीय नलकूपों को चालू करने की भी विभागीय पहल नहीं की जा रही है. इस संबंध में पूछने पर बीएओ सूरज कुमार ने कहा कि धान आच्छादन का 9407 हेक्टेयर लक्ष्य रखा गया था. लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत आच्छादन हो चुका है. उन्होंने भी स्वीकारा कि औसत से बहुत कम बारिश होने के कारण अब लोगों के खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं. धान की फसल इससे प्रभावित हो रहा है. इसकी रिपोर्ट जिला कार्यालय को लगातार भेजी जा रही है.
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