दरभंगा: जमीन-मकान की रजिस्ट्री की पारंपरिक कागजी प्रक्रिया डिजिटल होने के बाद शुरुआती मंदी के बाद अब रफ्तार पकड़ रही है. 17 अगस्त से लागू नयी व्यवस्था के तहत सात सितंबर तक कुल 52 भूमि दस्तावेजों का निबंधन हुआ है. इनमें सात सितंबर को ही आठ भूमि दस्तावेजों का निबंधन किया गया.
विभागीय स्तर पर बताया गया कि नयी प्रक्रिया से लोगों और सेवा प्रदाताओं के परिचित होने के साथ ही निबंधन की रफ्तार लगातार बढ़ रही है.
आधार सत्यापन से ई-साइन तक डिजिटल प्रक्रिया
पेपरलेस निबंधन में क्रेता और विक्रेता के आधार का सहमति आधारित सत्यापन किया जाता है. भूमि हस्तांतरण के लिए ओटीपी के माध्यम से सहमति लेकर ई-साइन कराया जाता है.
ओटीपी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अंगूठे के निशान या आइरिस के जरिए सत्यापन का विकल्प भी उपलब्ध है. हालांकि, निबंधन के लिए क्रेता और विक्रेता की निबंधन कार्यालय में उपस्थिति आवश्यक है.
नयी व्यवस्था में दस्तावेज नवीस और स्टांप विक्रेताओं को भी सेवा प्रदाता के रूप में जोड़ा गया है. उनके सहयोग के लिए निर्धारित पारिश्रमिक का प्रावधान किया गया है.
कागजी दस्तावेजों के झंझट से राहत
सोमवार को जिला भूमि दस्तावेज निबंधन कार्यालय परिसर में मौजूद शीशो पश्चिम के इंदु दास, खराजपुर के श्रीकांत कुमार, बहादुरपुर के जमील अहमद अंसारी, पंडासराय के गौड़ी पोद्दार और कोयला स्थान के नीरज कुमार ने नयी व्यवस्था को सुविधाजनक बताया.
उन्होंने कहा कि पहले दस्तावेज तैयार कराने और जांच के लिए कई बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता था. साथ ही कागजात को सुरक्षित रखने की चिंता भी रहती थी. डिजिटल रिकॉर्ड होने से दस्तावेजों को जरूरत के समय ऑनलाइन देखा जा सकता है और उसका प्रिंट भी निकाला जा सकता है.
शुरुआती दिक्कतों के बाद बढ़ी रफ्तार
जिला अवर भूमि निबंधन पदाधिकारी स्वीटी सुमन ने कहा कि शुरुआती तकनीकी और प्रक्रियागत दिक्कतों के बाद अब पेपरलेस निबंधन व्यवस्था गति पकड़ रही है. नयी व्यवस्था से लोगों और सेवा प्रदाताओं के परिचित होने के साथ निबंधन की प्रक्रिया में भी तेजी आ रही है.
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